News Desk

News Desk

यह कैसी धार्मिक मान्यता!-(रश्मि सती नैनवाल की वाट्सऐप वाल से साभार)

जनपद चमोली में 15 अगस्त शाम 5:30 बजे 20किलोमीटर दूर नन्दाकिनी (अलकनंदा) नदी के किनारे से लापता युवती सुमित्रा का आज शव मिल गया है। ये सिर्फ एक आम घटना नहीं बल्कि में एक ऐसी प्रथा से जुड़ी घटना भी…

मैंने गिर्दा को कैसे जाना-(इन्द्रेश मैखुरी)

बात 1994 की है. उत्तराखंड आंदोलन पूरे ज़ोर पर था. इसी बीच में उत्तराखंड आंदोलन पर नरेंद्र सिंह नेगी जी का कैसेट आया. आन्दोलन पर 7-8 गीत उसमें थे. उन्हीं में से एक गीत था-ततुक नी लगा उदेख,घुनन मुनई नि…

हम नहीं होंगे, फिर भी हम होंगे जनकवि गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’ के स्मृति दिवस (22 अगस्त, 2010) पर विशेष “ततुक नी लगा उदेख, घुनन मुनई न टेक, जैंता एक दिन तो आलो दिन य दुनि में” -(चारू तिवारी)

उनके गीतों में एक नई सुबह की उम्मीद के साथ निराशा से बाहर निकलने की चेतना है। इतिहास के अनुभवों, वर्तमान के संघर्षों और सुखद भविष्य की परिकल्पना की यह उम्मीद वे कई पीढ़ि़यों में देखते हैं। एक व्यक्ति, समाज…

एंटोनियो डी एंड्रेड, पुर्तगाली जेसुइट पादरी हिमालय पार कर तिब्बत पहुंचने वाले पहले ज्ञात यूरोपीय-(पूरन बिष्ट)

पूर्व पोस्ट से जारी- एंटोनियो डी एंड्रेड, पुर्तगाली जेसुइट पादरी थे। वे हिमालय पार कर तिब्बत पहुंचने वाले पहले ज्ञात यूरोपीय थे। उन्होंने पश्चिमी तिब्बत के छपरांग में कैथोलिक मिशन स्थापित किया था। सन् 1624 में श्रीनगर, बदरीनाथ होकर माणा…

अंकिता भंडारी को न्याय मिलने तक यह संघर्ष जारी रहेगा-(इन्द्रेश मैखुरी)

भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम की 17 अगस्त को घोषणा कर दी. केंद्रीय महामंत्री और उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी रहे दुष्यंत कुमार गौतम का नाम इस सूची में शामिल नहीं है. भाजपा किसे पदाधिकारी बनाए, किसे नहीं, यह…

देघाट गोलीकांड की बरसी (19 अगस्त, 1942) पर विशेषभारत छोड़ो आंदोलन का एक अविस्मरणीय पड़ाव-(चारु तिवारी)

भारत छोड़ो आंदोलन में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका रही। देघाट, सालम और सल्ट की क्रान्तियों ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई गति प्रदान की। पहाड़ में 1910 के बाद अंग्रेजी हुकूमत द्वारा जनविरोधी कानूनों को जबरन थोपने के खिलाफ स्थानीय स्तर…

संघर्ष वाहिनी बागेश्वर अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार बागेश्वर जिला मुख्यालय में धरने पर बैठी

संघर्ष वाहिनी बागेश्वर अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार आज बागेश्वर जिला मुख्यालय में धरने पर बैठ गई है। जिस समय संघर्ष वाहिनी धरने पर बैठी थी तब उनका मांग पत्र 13 बिंदुओं का था लेकिन जब प्रशासन के लोग आंदोलन…

उत्तराखंड के चिकित्सालयों में लापरवाही की वजह से होने वाली मौतों की गंभीरता से जांच की जाए तो जांच के आंकड़े चौंकाने वाले होंगे

यदि प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1 वर्ष पूर्व अपनी जनता के प्रति थोड़ी भी संवेदनशीलता दिखाई होती तो बागेश्वर चिकित्सालय की लापरवाही की वजह से मौत के मुंह में चले गए 14 माह के शिवांश के पिता…

30 वर्षों से उठी हुई मोटर मार्ग निर्माण की एक सूत्रीय मांग को मनवाने के लिए अपने ही गांव में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं फुलवारी के लोग

बागेश्वर जनपद के मल्लादनपुर में फुलवारी नाम की एक ग्राम पंचायत है। इस गांव पंचायत में फला चौंरा तथा खाली धार उप गांव हैं। आबादी के विस्तार के हिसाब से करीब 8 किलोमीटर चौड़ाई में बसे इस गांव के एक…

पूर्व पोस्ट से जारी- यात्रा विवरण: बद्रीनाथ की कथा सुन सकते में आ गए पुर्तगाली पादरी- ओ डेस्कोब्रिमेंटो दि तिब्बत (वरिष्ठ पत्रकार पूरन बिष्ट की कलम से)

402 साल पहले धर्म प्रचार के लिए तिब्बत जा रहे पुर्तगाली पादरीएंटोनियो डी एंड्रेड बद्रीनाथ के प्राकृतिक सौंदर्य देखकर भौचक्के रह गए। लेकिन अपने धार्मिक दुराग्रह के कारण बद्रीनाथ से जुड़ी कथाओं को मनगढंत बताकर पुजारियों से सवाल जवाब करने…