Category इतिहास

पूर्व पोस्ट से जारी- यात्रा विवरण: बद्रीनाथ की कथा सुन सकते में आ गए पुर्तगाली पादरी- ओ डेस्कोब्रिमेंटो दि तिब्बत (वरिष्ठ पत्रकार पूरन बिष्ट की कलम से)

402 साल पहले धर्म प्रचार के लिए तिब्बत जा रहे पुर्तगाली पादरीएंटोनियो डी एंड्रेड बद्रीनाथ के प्राकृतिक सौंदर्य देखकर भौचक्के रह गए। लेकिन अपने धार्मिक दुराग्रह के कारण बद्रीनाथ से जुड़ी कथाओं को मनगढंत बताकर पुजारियों से सवाल जवाब करने…

आजादी के दिन भी गिरफ्तारी हुई थी टिहरी में -(महिपाल नेगी)

इस बात पर आपको जरूर आश्चर्य होगा लेकिन यह सच है कि 15 अगस्त 1947 के दिन जब पूरा भारत आजादी का जश्न मना रहा था, उस दिन टिहरी गढ़वाल में आजादी के सेनानियों की गिरफ्तारियां हो रही थी। टिहरी…

ओ डेस्कोब्रिमेंटो दि तिब्बत (वरिष्ठ पत्रकार पूरन बिष्ट की कलम से) 402 साल पहले बदरीनाथ मार्ग पर बर्फ के पुल

एंटोनियो डी एंड्रेड, पुर्तगाली जेसुइट पादरी थे। वे हिमालय पार कर तिब्बत पहुंचने वाले पहले ज्ञात यूरोपीय थे। उन्होंने पश्चिमी तिब्बत के छपरांग में कैथोलिक मिशन स्थापित किया था। सन् 1624 में श्रीनगर, बदरीनाथ होकर माणा दर्रे से उन्होंने तिब्बत…

वीरेनदा एक ही जीवन में सब को कैसे सलीके से निभा ले गया- (अशोक पाण्डेय)

1966 बैच के आईपीएस मोहन भैया खुर्राट और बेहद ईमानदार पुलिस अफसर थे और मध्य प्रदेश के डीजी होकर रिटायर हुए थे. आलम यह था कि जिन दिनों वे मध्य प्रदेश के सबसे बड़े पुलिस अफसर थे तब भी उनके…

प्रखर अधिवक्ता, जनपक्षधर राजनेता और अध्येता शोबन सिंह जीना की जयंती (4 जुलाई, 1909) पर विशेष-(चारू तिवारी)

अभी आपातकाल खत्म हुआ था। देश में ‘समग्र क्रान्ति’ के नारे से निकले राजनीतिक विकल्प ‘जनता पार्टी’ लोगों के बीच अपनी विश्वसनीयता बना चुकी थी। इसी का परिणाम था कि 1977 में हुये आम चुनाव में चैगुटे ने इंदिरा गांधी…

23 जुलाई :चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर उन्हीं के बारे में-(संकलन-इन्द्रेश मैखुरी)

डॉ. भगवान दास माहौर की पुस्तक “यश की धरोहर” का अंश- थोड़ी चर्चा चन्द्रशेखर आजाद की वैचारिकी पर भी कर लेनी चाहिए. आम तौर पर उनके बारे में यह धारणा बनाने की कोशिश की जाती है कि वे कुछ धार्मिक…

महंगी कारों की खुली छतों से फूल-मालाओं से लदे लोग नीचे कहां देख पाते हैं-(चारु तिवारी)

किसी शोध छात्र के लिए ढूंढ तो कुछ और रहा था, लेकिन कुछ ऐसे पत्र मिले जो आंदोलनकारियों के बीच होने वाले गहरे संवाद और एक-दूसरे के प्रति सम्मान को बताते हैं। मैंने 1994 में पत्रकारिता के साथ कंप्यूटर का…

इमरजेंसी तो देश की अखंडता और एकता के हित में संवैधानिक मर्यादाओं की सीमा में थी -( विक्रम रमोला )

अभी जो लोग आपातकाल को एनसीईआरटी की किताब में एक जरूरी अध्याय के रूप में समायोजित करने का शोर शराबा कर रहे हैं ने शायद NCERT के कक्षा 12 की किताब ही नहीँ देखी, पढ़ना तो दूर की बात है……