Category इतिहास

इमरजेंसी तो देश की अखंडता और एकता के हित में संवैधानिक मर्यादाओं की सीमा में थी -( विक्रम रमोला )

अभी जो लोग आपातकाल को एनसीईआरटी की किताब में एक जरूरी अध्याय के रूप में समायोजित करने का शोर शराबा कर रहे हैं ने शायद NCERT के कक्षा 12 की किताब ही नहीँ देखी, पढ़ना तो दूर की बात है……

हमारे हिस्से के प्रो. डी.डी पंत (सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डी.डी पंत की पुण्यतिथि पर विशेष): चारू तिवारी

प्रो. डीडी पंत जी को पहली बार दूर से देखने का सुख मात्र एक वैज्ञानिक को देखने की बालसुलभ जिज्ञासा थी। उस समय पृथक उत्तराखंड राज्य के लिये उन्होंने एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल ‘उत्तराखंड क्रान्ति दल’ का गठन किया था।…

तिलाड़ी शहादत दिवस के मौके पर पौड़ी के वनाधिकारी द्वारा ग्रामीणों को जेल भिजवाने सम्बन्धी बयान के क्या मायने लगाए जाएं

ठीक उस समय पर जब हम जंगलात के आंदोलन से जुड़े तिलाड़ी के ऐतिहासिक आन्दोलन की शहादत को याद कर रहे हैं तब पौड़ी जनपद के वनाधिकारी द्वारा राजशाही अन्दाज में ग्रामीणों को जेल भेजने का बयान दे कर हमारे…

कुली बेगार आंदोलन का साक्षी है बागेश्वर का डाक बंगला

उत्तराखंड में बागेश्वर जनपद के बागेश्वर नगर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान 100 वर्षों तक कुली बेगार के खिलाफ अनवर चले आंदोलन के अहिंसक तरीके से सफल होने के साथ जुड़ी हुई है। मनुष्य को गुलाम बनकर काम करवाने का…