जनपद चमोली में 15 अगस्त शाम 5:30 बजे 20किलोमीटर दूर नन्दाकिनी (अलकनंदा) नदी के किनारे से लापता युवती सुमित्रा का आज शव मिल गया है।
ये सिर्फ एक आम घटना नहीं बल्कि में एक ऐसी प्रथा से जुड़ी घटना भी है जो हमने कभी नहीं सुनी ,आज के युग मे तो बिल्कुल नहीं सुनी।
घटना जनपद चमोली नंदानगर के ग्राम सभा सुतोल तातड़ा नामक तोक की है जहाँ भूमियाल देवता की पावन भूमि मानकर महिलाओं के मासिक धर्म के समय स्नान करने के लिए तातड़ा गांव से 5 किलोमीटर दूर सुतोल गांव में नंदाकिनी नदी किनारे स्नान करने जाना पड़ता है।वह गाँव की सीमा में स्नान नहीं करती।
सुमित्रा भी 15अगस्त के सांस्कृतिक कार्यक्रम देंखने के बाद शाम को नहाने के लिए तातड़ा से 5 किलोमीटर दूर नदी तट पर सुतोल गांव गयी , आकांशा तो उसी दिन से थी कि सुमित्रा को अलकनंदा ने समा लिया है ,क्योंकि युवती का चप्पल नदी में लगभग 1किलोमीटर दूर मिला था। वहीं आज उसके शव मिलने की पुष्टि हुई है।
इस घटना से मन बहुत दिन से आहत था पर हमारी धार्मिक मान्यताओं पर बात करना भी कठिन है, हम सबकी धार्मिक मान्यतायें है फिर सभी मान्यता स्त्रीयों के लिए क्यों ?
आज के युग मे स्त्रियों का घर से 5किलोमीटर दूर खुले व गन्दे स्थान पर स्नान करना, 5किलोमीटर की परिधि में जंगली जानवर, शराबी,आपराधिक तत्व और जो भी मिले उसे भी बताना की स्त्री मासिकधर्म से है। कितनी प्रताड़ना है महिलाओं के लिए ??
मेरा क्षेत्र के बड़े बुजुर्गों जागरूक युवाओं से अनुरोध है कि महिलाओं को ये प्रताड़ना मत दीजिये। इष्टदेवताओं आपके अपने है वो नहीं चाहेंगे उनके भक्तों की यू ज़िंदगी खत्म हो इसलिए इस प्रथा को अब बन्द कीजिये।





