भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम की 17 अगस्त को घोषणा कर दी. केंद्रीय महामंत्री और उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी रहे दुष्यंत कुमार गौतम का नाम इस सूची में शामिल नहीं है.
भाजपा किसे पदाधिकारी बनाए, किसे नहीं, यह उसका अपना सांगठनिक मामला है. लेकिन चूंकि दुष्यंत कुमार गौतम और पूर्व में उत्तराखंड भाजपा के संगठन महामंत्री रहे अजेय कुमार का नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड के वीआईपी के तौर पर भाजपा के ही ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के वायरल ऑडियो में लिया गया था, इसलिए दुष्यंत कुमार गौतम और अजेय कुमार के जांच का सामना करने और न्याय के कठघरे में खड़ा किये जाने का इंतजार उत्तराखंड को जरूर है.
अंकिता भंडारी ने अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए, अपने प्राण गंवा दिये. लेकिन वीआईपी बताये जा रहे यौन पिपासु अब भी कानून और न्याय की पकड़ से बाहर हैं.
अब चूंकि भाजपा ने दुष्यंत कुमार गौतम को राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम से बाहर कर दिया है, अजेय कुमार को राजस्थान भेज दिया है तो उन्हें कानून और न्याय का सामना करने के लिए कहा जाना चाहिए. सीबीआई ने फरवरी में अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच एक तीसरे असंबद्ध पक्ष की शिकायत पर अपने हाथ में ली, उसे अंकिता भंडारी के माता- पिता को शिकायतकर्ता बनाना चाहिए और जिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अधीन सीबीआई आती है, उन्हें सीबीआई को निर्देशित करना चाहिए कि सीबीआई जांच को ठंडे बस्ते से बाहर निकाले और दुष्यंत कुमार गौतम व अजेय कुमार को जांच और पूछताछ का हिस्सा बनाए.
ऐसा नहीं किया जाता तो यह समझा जाएगा कि भाजपा के लोगों द्वारा ही लगाए गए वीआईपी होने के आरोपों से भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इन्हें बचाना चाहता है.
अंकिता भंडारी को न्याय मिलने तक यह संघर्ष जारी रहेगा.





