आज सुबह राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार किया गया कि मुख्य न्यायाधीश ने राहुल गांधी से मिलने के लिए मना कर दिया है। दोपहर बाद प्रचार को थोड़ा बदल गया कहा गया कि राहुल गांधी ज्ञापन लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने जा रहे हैं । शाम तक प्रचार किया गया की मुख्य चुनाव आयुक्त ने ज्ञापन नहीं लिया।
यह सारे प्रचार उस बौखलाहट से बाहर निकलते रहे जो बौखलाहट समझ चुकी है कि नरेंद्र मोदी और उनकी मंडली राहुल गांधी के चक्रव्यूह में बुरी तरीके से फंस चुके हैं तथा मोदी और उनकी मंडली को इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है।
राहुल गांधी द्वारा डिजायन किए गए इस चक्रव्यूह में सबसे पहले उस विधायिका को कसा गया जिस विधाइका के सहारे भारतीय लोकतंत्र के संविधान पर संगठन विशेष का अतिक्रमण कराने का खतरनाक खेला खेला जा रहा हैं।
दूसरे कदम पर राहुल गांधी ने कार्यपालिका को अपने चक्रव्यूह में कसना शुरू किया। इस खेल में पीएमओ से लेकर पटवारी के दफ्तर तक फैली हुई कार्यपालिका राहुल गांधी के निशाने पर थे । राहुल गांधी अपने अन्दाज में कार्यपालिका को चेतावनी और सुझाव देते रहे हैं कि अपना काम संविधान के पक्ष में निर्भीकता से करें । कार्यपालिका की स्थिति बहुत बेहतर नहीं इसलिए कार्यपालिका को किसी भी चक्रव्यूह में आसानी से घेरा जा सकता है।
राहुल गांधी का तीसरा निशान न्यायपालिका है । जिनको लग रहा था कि राहुल गांधी न्यायपालिका ज्ञापन देने गए थे या कोई मुकदमा दर्ज करने गए थे तो आज की शाम होने तक उनका भ्रम टूट चुका होगा। राहुल गांधी न्यायपालिका ना तो मुकदमा दर्ज कराने गए थे और ना ही कोई ज्ञापन देने गए थे। सीधे-सीधे दो शब्दों में कहा जाए तो न्यायपालिका को चेतावनी देने गए थे कि मैं राहुल गांधी हूं , देश के साथ तुम्हारे पास आया यह बताने आया हूं कि देश आपकी करतूतों को देख रहा है, समझ रहा है समय रहते संविधान के पक्ष में अपने आप को ढाल लीजिए ।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि राहुल गांधी न्यायपालिका को चेतावनी देने के अफने लक्ष्य में कामयाब हो गए हैं।
जिस चक्रव्यूह में राहुल गांधी ने दिखाने भर के लिए सिर्फ मोदी को घेरा था उस चक्रव्यूह में मोदी और उनकी पूरी की पूरी मंडली अंबानी, अडानी, सलाहकार एक-एक कर खुद घिरते चले गए।
मोदी आरएसएस और अंबानी अडानी को कुछ दिनों के बाद समझ में आएगा कि राहुल ने जिस चक्रव्यूह को डिजाइन किया है उस चक्रव्यूह में वे पूरी तरीके से फंस चुके हैं तथा इस चक्रव्यूह में थोड़ी सी सांस लेने का एक ही रास्ता है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा करवा दिया जाए।
ज्ञानेश कुमार के स्थीफे के अलावा कोई रास्ता अब शेष नहीं बचा है।
जो मोदी राज को महान राज साबित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तत्पर हैं, दीवाने हैं, तैयार हैं उनकी समझ के हिसाब से उनके लिए राहुल गांधी द्वारा तैयार किए गए इस चक्रव्यूह के डिजाइन को समझ पाना हाल फिलहाल तो मुमकिन नहीं है।
राहुल गांधी के इस चक्रव्यूह को देश जैसे-जैसे समझ रहा है वैसे-वैसे राहत की सांस ले रहा है कि जिस लोकतंत्र पर खुलेआम प्रहार हो रहे थे उस लोकतंत्र को बचाने के लिए वह पुरुष सामने आया है जिसने भाजपा, आरएसएस, अंबानी अडानी के सारे हथकंडे यूं उछाल दिए जैसे कोई कुशल खिलाड़ी फुटबॉल उछलता है।
राहुल गांधी न्यायपालिका को चेतावनी देने के अफने लक्ष्य में कामयाब हो गए हैं, अब ज्ञानेश कुमार के स्थीफे के अलावा कोई रास्ता शेष नहीं बचा है





