नरेंद्र मोदी राहुल गांधी के चक्रव्यूह में बुरी तरीके से फंस चुके हैं। इस चक्रव्यूह से मोदी बाहर कैसे निकल पाएंगे यह तो कल के गर्भ में है लेकिन अभी जो हालात हैं उन हालातो में लगता नहीं है कि मोदी जी राहुल के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे।
आज की तारीख में पूरे भारतवर्ष के औने-कौने में एक ही मांग उठी हुई है कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश इस्तीफा दो । राष्ट्रपति, सरकार या सर्वोच्च न्यायालय से मांग नहीं की जा रही है कि वह ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करें।
इस मांग के साथ खड़े हो चुके आंदोलन का थोड़ा सा अध्ययन किया जाए तो पिछले दो महीने पहले तक यह लड़ाई अकेले राहुल गांधी की लड़ाई थी। बिहार चुनाव से पूर्व संसद सत्र में राहुल गांधी ने वोट चोरी को लेकर सबूत के साथ अपनी बात रखी थी। पत्रकार वार्ताएं की थीं और हर माध्यम से वोट चोरी को जनता तक पहुंचाने की पूरी कोशिश मैं राहुल गांधी अपने तरीके से लगे हुए तो थे लेकिन तब ना ममता बनर्जी, ना अखिलेश यादव, ना तेजस्वी, ना ही स्टालिन और इंडिया गठबंधन का अन्य कोई भी साथी राहुल गांधी के साथ खड़े होने को तैयार नहीं था।
दिल्ली बिहार बंगाल प्रान्तों के चुनाव के बाद गठबंधन के साथी सदस्यों को समझ में आने लगा था कि राहुल सही दिशा में जा रहे हैं , लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। राहुल गांधी ने जब संसद में इस मुद्दे को उठाया था तभी यदि गठबंधन के सदस्य गंभीर हो जाते तो बंगाल बिहार का चुनाव लुटने से बचाया जा सकता था।
इंडिया गठबंधन से किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिलने की स्थिति में राहुल गांधी ने लड़ाई का जो नया प्लेटफार्म बनाया था वह छात्रों के बीच जाकर संवाद को देश भर में फैलाने की एक तरकीब के रूप में सामने आया।
वोट चोरी के साथ ही राहुल गांधी नीट पेपर लीक को लेकर भी पूरे देश में मुखर हुए थे और धर्मेंद्र प्रधान के स्थीफे की मांग भी सबसे पहले राहुल गांधी की ओर से ही उठी थी। जब राहुल गांधी नीट परीक्षा को लेकर पूरे देश से सवाल पूछ रहे थे तब अमेरिका में रह रहे नौजवानों के छोटे समूह का कॉकरोच शब्द के साथ सामने आना, फिर धर्मेंद्र प्रधान के स्थीफे की मांग के आंदोलन के रूप में जंतर मंतर पर एकत्रित होना छात्रों के आगे झुकते हुए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाना एक ऐतिहासिक घटना थी।
जब कॉकरोच शिक्षा मंत्री के स्थीफे की मांग पर है जंतर मंतर में एकत्रित हुए तब भी राहुल गांधी वोट चोरी को लेकर यूथ कांग्रेस और एन एस यू आई के साथ सड़कों पर उतरे हुए थे और किसी भी तरीके से वोट चोरी करके सत्ता में स्थापित होने की भारतीय जनता पार्टी की चालबाजियों को जनता के बीच ले जा रहे थे।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ कॉकरोच अपने-अपने रास्ते पर आगे को बढ़ गए लेकिन राहुल गांधी वोट चोरी के अपने आंदोलन के साथ में मोदी सत्ता के खिलाफ डटे रहे।
ऐसे समय और स्थिति में जब राष्ट्रीय मीडिया राहुल गांधी के पूरी तरह से खिलाफ खड़ा था तब इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट ने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप को पूरे देश की जुबान बना दिया। इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दी गई यही जुबान थी कि इंडिया गठबंधन के सभी साथी ही नहीं कॉकरोचों को भी लगा कि मामला गंभीर भी है और संगीन भी है।
इंडियन एक्सप्रेस में जो छपा उस छपे के बाद पूरे देश में कौने-कौने से चुनाव आयुक्त के स्थीफे की मांग उठने लगी। यहां गौरतलब यह है कि चुनाव आयुक्त से तो लोग इस्तीफा मांग रहे हैं लेकिन सरकार से नहीं कह रहे हैं कि चुनाव आयोग को बर्खास्त करो और ना ही न्यायालय से मांग कह रहे हैं कि चुनाव आयोग द्वारा लोकतंत्र के खिलाफ किये जा रहे लोकतंत्र विरोधी खतरनाक कृत्य पर अदालत में मुकदमा चलाए ।
यही वह स्थित है जो भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस को पूरी तरह से राहुल गांधी के चक्रव्यूह में फंसा देती है। आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी की ओर से बहुत बड़े-बड़े नामचीन नेता चुनाव आयुक्त के पक्ष में खड़े हो चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी के बहुत सारे आईटी सेल सीधे-सीधे चुनाव आयोग के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं। बहुत सारे छोटे-छोटे संगठन जो अपने आप को हिंदूवादी संगठन या सनातनी संगठन कहते हैं तथा भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस का घटक बनना चाहते हैं वह भी ज्ञानेश कुमार के पक्ष में खड़े हो गए हैं ।
ज्ञानेश के पक्ष में जो भी संगठन सामने आए हैं वे अनजाने में ही सही यही मोहर लगा रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार को भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस बचा सकते हैं। इसी मोरबद्धता से नया सवाल भी शुरू हो जाता है कि भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस उस ज्ञानेश कुमार को क्यों बचा के रखना चाहते हैं जिस ज्ञानेश कुमार के स्थीफे की मांग आरएसएस तथा भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर पूरा देश कर रहा है।
हर समझदार आदमी जानता है कि भारतीय जनता पार्टी ज्ञानेश कुमार से खुल कर इस्तीफा नहीं मांगेगी लेकिन पानी गले से ऊपर चढ़ जाएगा तब अन्दर खाने ज्ञानेश कुमार पर दबाव डाल सकती है कि वह इस्तीफा दे दे।
आरएसएस और भाजपा यदि ज्ञानेश कुमार के ऊपर दबाव डालती है तो फिर ज्ञानेश कुमार के पास भी कोई रास्ता बचा हुआ नहीं होगा । लेकिन ज्ञानेश कुमार भी इस बात को जानता है कि यदि चुनाव आयुक्त के पद से वह इस्तीफा दे देगा तब भारतीय जनता पार्टी आरएसएस के ऊपर सीधे-सीधे आरोप पुष्ट हो जाएगा की केंद्र की सरकार, दिल्ली की सरकार, बंगाल की सरकार और बिहार की सरकार लूटी हुई सरकार है । भारतीय जनता पार्टी आरएसएस इस तोहमत से बचने के लिए अंत तक कोशिश करेंगे कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा ना दे ।
भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की समझ में अब यह भी आ गया होगा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा अगर नहीं दिया जाता तब भी उनका दल बिना सैन्य बलों की ताकत के सड़क पर स्वतंत्र रूप से नहीं निकल सकता है।
इन 10-12 सालों में आरएसएस का जो प्राचीन चेहरा था वह धूमिल हो चुका है । आज की तारीख में आरएसएस भाजपा की तरह एक राजनीतिक संगठन के रूप में जाना जाने लगा है । ऐसे में अब भाजपा के पास ना तो कोई हिंदूवादी संगठन और नाहीं आरएसएस ही बचा है जो सड़कों में गलियों में उतर कर लोगों के बीच संवाद कर सके और लोग लोगों के बीच खोई हुई अपनी साख को जीवित कर भाजपा के पक्ष में खड़ा हो सके।
राहुल के चक्रव्यूह में पूरी तरह से जकड़े हुए मोदी क्या करेंगे यह 10 – 12 दिन के अंदर सामने आ जाएगा। लेकिन राहुल गांधी के चक्रव्यूह से मोदी भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस को कैसे बाहर निकलेंगे यह बड़ा सवाल है।





