एक निर्दलीय विधायक से इतना डर क्यों, हरीश रावत जी?
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और दशकों तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हरीश रावत जी ने आज मेरे ऊपर इतना लंबा लेख लिखा। मैंने उनका पूरा लेख पढ़ा।
सबसे पहली बात , जब जन निर्माण पार्टी की स्थापना हो चुकी है और मैं उसके टिकट पर खानपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुका हूँ तो मेरे नाम को ढाल बनाकर कांग्रेस हाई कमान को झूठ का पुलिंदा खोलकर दिखा रहे हो कि कुछ लोग हरिद्वार में उमेश कुमार को कांग्रेस में लाना चाहते है।
हरदा, आपकी कांग्रेस आपको मुबारक । मेरा नाम पर अपनी सियार वाली सियासत का रंग मत दिखाओ। दूसरी बात हरदा, याद करना वो दिन जब दिन में चार फ़ोन करते थे ?
पढ़ने के बाद मेरे मन में गुस्सा नहीं आया, बल्कि एक सवाल आया, आखिर खानपुर का एक निर्दलीय विधायक इतना महत्वपूर्ण कब हो गया कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को सात बैठकर उसके ऊपर पूरा राजनीतिक लेख लिखना पड़े?
आपने 2016 याद दिलाया है। ठीक किया।
इतिहास को याद रखना चाहिए और पूरा याद रखना चाहिए। हाँ मैंने आपकी सरकार गिरायी , पर क्या आपके कर्म ठीक थे ? अगर एक अकेला व्यक्ति आपकी सरकार गिरा सकता है, वो क्या आपसे डरता होगा ?
2016 में जो राजनीतिक घटनाक्रम हुआ, उसमें मेरी भूमिका क्या थी, उस पर वर्षों से सार्वजनिक बहस होती रही है। आप आज भी उस घटना को याद करते हैं। यदि दस वर्ष बाद भी आपको उस दौर में मेरी भूमिका इतनी महत्वपूर्ण दिखाई देती है कि आज की राजनीति में भी उसी का उल्लेख करना पड़ रहा है, तो इसका फैसला उत्तराखंड की जनता स्वयं कर सकती है कि 2016 में कौन किसके लिए कितना महत्वपूर्ण था।
लेकिन असली सवाल 2016 नहीं है।
असली सवाल 2027 है।





