नेतन्याहू की स्थिति बड़ी डाँवाडोल हो गई है। उन्होंने इस्राएली राष्ट्रवाद के घोड़े पर सवार होकर जैसे धतकरम किए, उसका परिणाम 27 अक्टूबर, 2026 को हुए चुनाव में सामने आया है। जिसमें नेतन्याहू के दक्षिणपंथी + हरेदी ब्लॉक को संसद की लगभग 53 सीटें मिलीं हैं। जबकि 120 सीटों वाली केनेसेट (संसद) में सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटें चाहिए। दूसरी ओर गादी आइज़ेनकोट के नेतृत्व में विपक्षी ब्लॉक को लगभग 48 और अरब पार्टियों को रिकॉर्ड ~19 सीटें। किसी के पास भी स्पष्ट बहुमत (61) नहीं है।
उधर, हरेदी यहूदी सड़कों पर उतर कर उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। वे सड़कों पर मुख्य रूप से इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) में अनिवार्य भर्ती का विरोध करते हुए उत्पात मचा रहे हैं क्योंकि इस्राएल की स्थापना के बाद से येशिवा में पढ़ने वाले हरेदी छात्रों को सेना में भर्ती होने से मिली छूट को 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी घोषित कर दिया था। उसके बाद से सेना और पुलिस कुछ भर्ती से बचने वालों को गिरफ्तार कर रही है।
हरेदी समुदाय का तर्क है कि तोराह की निरंतर पढ़ाई ही यहूदी पहचान और आध्यात्मिक रक्षा का आधार है; सेना में भेजे जाने से युवा अपनी धार्मिक परंपरा से दूर हो सकते हैं।
इसके विपरीत, इस्राएल के कई अन्य नागरिक—खासकर गाजा युद्ध के बाद—मानते हैं कि जब अन्य लोग सेना में सेवा दे रहे हैं और जान गँवा रहे हैं, तो हरेदी समुदाय को भी समान राष्ट्रीय जिम्मेदारी निभानी चाहिए। सेना में सैनिकों की कमी और इस समुदाय को मिल रही बड़ी सरकारी सब्सिडी ने यह रोष और बढ़ाया है।
चरमपंथी हरेदी प्रदर्शनकारी ‘सेना में जाने से मरना बेहतर’ जैसे बैनरों के साथ यरूशलेम, तेल अवीव और मोदिइन जैसे शहरों में सड़कें जाम कर रहे हैं, भर्ती से इनकार करने वालों की गिरफ्तारी रोकने की कोशिश कर रहे हैं और कई जगह पुलिस से झड़पें हुई हैं।
इस्राएल की आबादी में लगभग 14% हिस्साधारी पुरातनपंथी हरेदी यहूदी इज़राइल का सख्त धार्मिक समुदाय हैं जो पारंपरिक यहूदी जीवनशैली, येशिवा (धार्मिक स्कूलों) में पूर्णकालिक तोरा अध्ययन और धार्मिक रूढ़िवादी कट्टरपंथी मान्यताओं का पालन करते हैं। आमतौर पर काले कपड़े, टोपी और साइड-कर्ल्स पहनने वाला यह वर्ग सेकुलर समाज से अलग रहना पसंद करता है और सेना में भर्ती होने को अपनी साम्प्रदायिक पहचान के लिए खतरा मानता है। उनकी जन्म दर अन्य इस्राएलियों से काफी अधिक है।
गाजा व अन्य मोर्चों पर युद्धरत सेना में जवानों की भारी कमी है। जबकि लगभग 67 से 80 हजार हरेदी युवा भर्ती उम्र के हैं लेकिन उनमें से ज्यादातर सेना में नहीं जाते। इससे सेकुलर इज़राइलियों में नाराजगी बढ़ी है क्योंकि वे और उनके परिवार भारी बोझ उठा रहे हैं। हरेदी पक्ष कहता है कि तोरा अध्ययन राष्ट्र की रक्षा करता है और सैन्य जीवन उनकी धार्मिकता को नष्ट कर देगा।
इस तरह विवाद के गहराते जाने से गृहयुद्ध की सम्भावना बन रही है। तनाव बहुत गंभीर है और सामाजिक विभाजन गहरा हो रहा है। दोनों पक्षों में गुस्सा है। कुछ राजनेताओं और टिप्पणीकारों ने गृहयुद्ध या बड़े पैमाने पर हिंसा की चेतावनी दी है। पत्थरबाजी, सड़क जाम, पुलिस के साथ झड़प से प्रदर्शन कभी-कभी हिंसक हो जाते हैं।
अगर बड़े पैमाने पर जबरन भर्ती लागू हुई या राजनीतिक गतिरोध बढ़ा, तो हिंसा बढ़ सकती है। यह मुद्दा इज़राइल के भविष्य के लिए सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक बन गया है।
नेतन्याहू काम-चलाऊ प्रधानमंत्री बने हुए हैं। गठबंधन वार्ता चल रही है। हरेदी पार्टियाँ (शास, यूनाइटेड तोरा यहूदी) छूट की गारंटी के बिना किसी सरकार में शामिल होने से इनकार कर रही हैं, जो उनकी स्थिति को जटिल बनाता है। विपक्ष को अरब पार्टियों के साथ समझौता करना पड़ सकता है, जिससे कई यहूदी मतदाता नाखुश हैं। नेतन्याहू अभी भी सत्ता में बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे राजनीतिक रूप से मजबूत दिख रहे हैं लेकिन सत्ता पर पूर्ण नियंत्रण नहीं है।
नेतन्याहू चुनाव में बचे तो हैं, लेकिन गठबंधन बनाने में बड़ी चुनौती है।♦️
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