“बागेश्वर में सीमांत पर्वती जनपद बाल विज्ञान महोत्सव”अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ ,सौ में लगा तागा चोर निकल कर भागा।

ऐसे समय में जब देश का नौजवान अपने भविष्य को लेकर चिंतित है और गुस्से से भरा हुआ है और सड़कों पर उतरा हुआ है तब भारतीय जनता पार्टी द्वारा स्कूल कॉलेजों में छात्रों के माध्यम से नौजवानों को मनाने की कोशिश के बे सिर पैर वाले प्रयोग किया जा रहे हैं।
भाजपा के ये राजनीतिक हथकंडे छात्रों को तो नहीं मना पा रहे हैं लेकिन इसके विपरीत अभिभावकों में गुस्सा भर ही रहे हैं कि जिन बच्चों को पढ़ने के लिए अभिभावक अपनी जीवन की गाड़ी कमाई खर्च कर विद्यालय कॉलेज में भेजते हैं वे विद्यालय उनके बच्चों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए क्यों कर रहे हैं।
इस सप्ताह देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री के जन्म दिन को लेकर चार दिन के अंदर दो कार्यक्रम बागेश्वर में प्रशासन और भाजपा की संयुक्त देखरेख में करवाए गए।
इन दोनों कार्यक्रमों में कई सवाल सामने आए । सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि यूकास्ट ने जनपद स्तरीय विज्ञान महोत्सव का यह कार्यक्रम राजकीय इंटर कॉलेज या राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में क्यों नहीं करवाया, इस कार्यक्रम के लिए विचारधारा विशेष से जुड़े हुए इंटर कॉलेज को ही क्यों चुना गया। जिन छात्रों के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया या करवाया गया उन छात्रों को क्या लाभ हुआ ।
देश के प्रधानमंत्री के जन्मदिन के नाम पर बनाए गए कार्यक्रम को लेकर पूरे जनपद में एक ही सवाल पूछा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता सार्वजनिक स्थानों पर जनहित के कार्यक्रम करवाने से क्यों डर रहे हैं। प्रधानमंत्री के नाम पर स्नातकोत्तर महाविद्यालय बागेश्वर में किए गए कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के प्रायः अधिक से अधिक नेता मौजूद थे। स्कूलों कालेजों में पढ़ने वाले छात्रों को यहां बुलाया गया था या बैठाया गया था। नहीं थी तो सिर्फ जनता नहीं थी। वैसे भी असोज के महीने में जनता के पास इतनी फुर्सत कहां होती है कि वह सरकार के ऊल-जुलूल कार्यक्रम में जाकर मनोरंजन कर सके।
प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाने के ठीक दो दिन बाद यूकास्ट द्वारा सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का कार्यक्रम यदि राजकीय इंटर कॉलेज में करवाया गया होता तो बिना निमंत्रण के भी लोग वहां पहुंचकर मुख्यमंत्री को सुन सकते थे या फिर मुख्यमंत्री से सवाल पूछ सकते थे । आम आदमी कार्यक्रम में ना पहुंच सके की सोच के तहत ही मुख्यमंत्री के दौरा ऐसे विद्यालय में करवाया गया जिस विद्यालय में निमंत्रण के बिना मुख्यमंत्री को सुनने के लिए आम आदमी जा ही नहीं सकता था।
बागेश्वर नगर में राजकीय इंटर कॉलेज ही इस कार्यक्रम के लिए सबसे महत्वपूर्ण कॉलेज होना चाहिए था लेकिन दुर्भाग्य यह की वर्तमान सरकार के लिए राजकीय इंटर कॉलेजों के कोई मायने बचे ही नहीं है।
शायद आयोजकों का मकसद रहा होगा कि कार्यक्रम भी हो जाए और जनता भी ना आए। जनता आती तो अपने हिस्से के सवाल भी साथ लेकर आती।
उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से बागेश्वर का प्रत्येक नागरिक एक ही सवाल पूछ रहा है कि विज्ञान पर केंद्रित इस कार्यक्रम में सारे बड़े-बड़े नेता थे लेकिन उच्च श्रेणी के वैज्ञानिक नहीं थे, पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय हमारे नजदीक का विश्वविद्यालय है वहां से कृषि क्षेत्र में कार्य कर रहे वैज्ञानिकों को आसानी से बुलाया जा सकता था लेकिन यह जरूरी नहीं समझ गया।
भूगर्भ विज्ञान, आपदा नियंत्रण विज्ञान, वन विज्ञान, भौतिक विज्ञान , रसायन विज्ञान के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोफेसर लेखक उत्तराखंड में बहुत हैं लेकिन आयोजकों की जानकारी वहां तक नहीं पहुंची तो यह आयोजकों की मंदबुद्धि ही मानी जाएगी या फिर कोई चालकी।
लगता है कि आयोजकों द्वारा जरूरी सिर्फ यह समझ गया की विधायकों, मुख्यमंत्री और राजनीतिक नेताओं की कैसे भी स्कूल स्तरीय विज्ञान के इस कार्यक्रम में उपस्थिति करवाई जाए जनता अगर सवाल पूछेगी तो भाड़ में जाए।

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