
धार्मिक उन्माद, असहाय कानून-(डॉ प्रभात उप्रेती)
लिखने को मन नहीं करता। लेखन में धार तो है पर सत्ताधारियों ने अपने धर्म की धार इतनी मजबूत बना ली है कि अपनी धार उससे टकराकर भोथरी हो जाती है। आज से 20 साल पहले हरिद्वार में एक दुकानदार…

लिखने को मन नहीं करता। लेखन में धार तो है पर सत्ताधारियों ने अपने धर्म की धार इतनी मजबूत बना ली है कि अपनी धार उससे टकराकर भोथरी हो जाती है। आज से 20 साल पहले हरिद्वार में एक दुकानदार…

वर्ष 2013 की आपदा के बाद अस्तित्व के संकट से जूझ रहे कपकोट विकासखंड के दूरस्थ कुंवारी गांव में मंगलवार को आस्था, संस्कृति और नई उम्मीद का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला। गांव में नवनिर्मित मन्दिरों में भगवती माता एवं…

सवाल तो प्रशासन और सरकार से है कि जिस इलाके में इनर लाइन परमिट के बिना कोई भी नहीं जा सकता, वहां कोई गुजरात का ट्रस्ट, राजस्थान से ट्रक लेकर पहुंच कैसे गया ? ये ट्रस्ट किसका है, किसकी शह…

यह सर्वविदित है कि हमारा उत्तराखंड दो मंडलों, कुमाऊं और गढ़वाल से मिलकर बना है। कुमाऊं में बोली जाने वाली लोक भाषा कुमाउनी कहलाती है और गढ़वाल में बोली जाने वाली लोक भाषा गढ़वाली कही जाती है। इन दोनों लोक…