पिछले 10- 12 दिनों से छोटे बच्चियों के साथ अपहरण सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटनाएं सामनेआई हैं। चाहे वह पश्चिम बंगाल हो ,राजस्थान हो या उत्तर प्रदेश । इसके अलावा भी देश के अलग-अलग हिस्सों से छोटी बच्चियों, महिलाओं चाहे वह किसी भी उम्र की हो, के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं।
सरकारें आती हैं और जाती हैं। पार्टियां पक्ष की हो या विपक्ष की, जब भी कोई ऐसी घटना होती है वह कुछ बयान बाजी करती है, न्याय दिलाने की बात करती है , उस समय की सरकार को इसके लिए जिम्मेदार भी ठहराती है। और जब वहीं विपक्षी पार्टी सत्ता में आती है तो उसके सुर बदले हुए होते हैं। जिसका उदाहरण है कोलकाता के RG KAR Medical College Hospital में एक डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी , तब इस मामले ने बहुत तूल पकड़ा था और घटना के सेंटीमेंट का फायदा उठाने के लिए उसकी मां रत्ना देबनाथ को बीजेपी से टिकट मिला । वह जीत भी गई, लेकिन जब दक्षिण 24 परगना में हुई घटना के बारे में उनसे पूछा गया तब उन्होंने कहा कि “उनकी बेटी का केस अलग था वह सेफ़ जगह पर थी और यह केस अलग है ।पता नहीं वह लड़की घर पर थी या बाहर थी।“ सत्ता का ऐसा नशा चढ़ा कि उन्हें अपनी बेटी का केसअलग लगने लगा और यह केसअलग ।
भाजपा का चाल चरित्र और चेहरा यही है । इसके राज करने का एक खास मॉडल है। बुलडोजर ,एनकाउंटर और अपने लोगों का बचाव। तभी इनके बड़े नेता चाहे वह कुलदीप सेंगर हो, बृजभूषण हो , चिन्मयानंद हो – गंभीर आरोपों के बावजूद प्रशासन उनके साथ ढील बरत रहा है और प्रशासन का पक्ष अक्सर ही दोषियों के साथ दिखता है ।
राजस्थान में श्रीगंगानगर में जिस तरह बुलडोजर चलवा कर होटल गिरवाए गए हैं और पश्चिम बंगाल में जिस तरह आरोपी प्रभास मंडल का रात के पौने दो बजे पुलिस ने एनकाउंटर किया यह डबल इंजन की सरकार की शैली का ही हिस्सा है ।इन्हें संविधान, न्याय व्यवस्था तथा न्याय प्रक्रिया में यकीन नहीं है ।
एक हालिया मामला राजस्थान के श्रीगंगानगर का है , जहां एक 13 वर्ष लड़की 18 जून को अपने घर से निकली अपने एक दोस्त से मिलने। उसके दोस्त ने ही उसके साथ बलात्कार किया।बाद में घर लौटते समय वह संभवत सेक्स रैकेट की चपेट में आ गई और एक रिक्शा चालक के माध्यम से वह होटल दर होटल पहुंची, जहां 5 दिनों तक लगातार उसके साथ दो दर्जन से अधिक लोगों ने बलात्कार किया। मामला प्रकाश में आने के बाद पॉस्को के तहत मुकदमा दर्ज तो हुआ और कुछ लोग गिरफ्तार भी हुए , परंतु इस घटना के बाद जिस तरीके से स्थानीय प्रशासन ने तीन होटल को बुलडोजर से जमींदोज़ कर दिया वह इस ओर इशारा करता है की विधि द्वारा स्थापित कानून पर उनका कोई भरोसा नहीं और इंस्टेंट जस्टिस की ऐसी मिसाल कायम करना चाहते हैं जो पॉपुलर तो हो सकता है लेकिन यह एक खतरनाक ट्रेंड है।
दूसरी घटना पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरूईपुर इलाके की है जहां एक 12 वर्ष की लड़की , 4 जुलाई को अपने घर से निकली अपनी सहेली के जन्मदिन का उपहार खरीदने परंतु वापस घर ना लौटी। घरवालों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और अगले दिन 5 जुलाई 2026 को एक स्थानीय तालाब से उसका शव बंद बोरी से बरामद किया गया।
उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया कि जब दरिंदों ने उसे बोरी में भरकर तालाब में फेंका तब वह जिंदा थी। उसके शरीर की चोटों ,जख्मो के निशान गवाह थे कि उसका बलात्कार करके बेरहमी से मौत के हवाले किया गया है।
ऐसे सारे मामले हमारे सामने कई प्रश्न खड़े करते है, मसलन समाज में हो रहे लगातार नैतिक पतन का क्या सिर्फ़ कोई एक कारण है ? या वर्चस्व वादी पुरुष मानसिकता, पितृसत्ता,पतनशील पूंजीवादी संस्कृति और टेक्नोलॉजी का बेलगाम दुरुपयोग मिल जुल कर इसमें भूमिका निभा रहे है, जिसकी वजह से महिलाओं और बच्चियों के ऊपर यौन हिंसा का प्रहार रुकने के बजाय लगातार नए नए रूपों में सामने आ रहा है।
सवाल ये भी उठता है कि क्या ऐसी घटनाओं को सख्त से सख्त कानून बना कर रोक जा सकता है? या इसके लिए चौतरफा प्रयास करने की जरूरत है ताकि पितृसत्ता और पतित पूंजीवादी संस्कृति पर निर्णायक प्रहार हो सके।

