उत्तर प्रदेश में पुलिस का खूंखार चेहरा ! “किसी भी राज्य की पुलिस उस राज्य की सत्ता का आईना होती है” (इन्द्रेश मैखुरी)

मेरठ में एक दलित युवती ललिता गौतम की हत्या के मामले में न्याय की मांग के लिए सड़क पर उतरे लोगों के साथ मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय, जिस तरह का सलूक कर रहे हैं, वो बाकी जो भी हो, कानून सम्मत तो नहीं है.

वे प्रदर्शनकारियों को माइक पर गाली दे रहे हैं. पुलिस कस्टडी में गाड़ी में बैठाए गए लोगों के साथ गाड़ी में घुस कर मारपीट कर रहे हैं. कानून की कौन सी धारा में किसी पुलिस अधिकारी को यह हक है कि वो गिरफ्तार किये गए लोगों के साथ मारपीट कर सकता है ?

ऐसा अधिकार तो पुलिस को नहीं है. गिरफ्तार किये गए लोगों को पुलिस की गाड़ी में घुस कर पीटने से तो ऐसा लगता है कि जैसे गिरफ्तार किये गए लोगों से निजी खुन्नस निकाली जा रही हो ! पुलिस और उसके अफसर अगर खुद कानून के दायरे में रह कर काम नहीं कर सकते तो वे दूसरों से कैसे अपेक्षा करते हैं कि वे कानून के दायरे में रहें ?

सरेआम गाली गलौच और मारपीट करने वाले ये सज्जन आईपीएस हैं. आईपीएस और आईएएस के बारे में लोग कहते हैं कि इसमें देश के क्रीम चुनी जाती है ! ऐसे अफसरों को देख कर लगता है कि उस क्रीम में काफी फफूंद लग चुकी है ! हाथापाई और गाली देने का इतना ही शौक था तो बॉउंसर बनते अविनाश बाबू, पुलिस अफसर काहे बन गए ?

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x