माननीय अमित शाह जी गृहमंत्री भारत सरकार
समाचार पत्रों ,मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि भारत सरकार के गृहमंत्री माननीय अमित शाह जी कल 6 नवंबर को देहरादून आ रहे हैं। माननीय गृहमंत्री जी उत्तराखंड की जनता, उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के मां-बाप सभी लोग अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सभी हत्यारों को सलाखों के पीछे देखना चाहते हैं।
आपको मालूम होगा कि सोशल मीडिया में उर्मिला सनावर एवं भाजपा नेता सुरेश राठौड़ के एक ऑडियो वीडियो में उनकी आपसी बातचीत में अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीवीआईपी के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम ,अजय कुमार का नाम आया है।
उर्मिला सनावर ने इस संबंध में सभी साक्ष्य सीबीआई को जांच में दिये हुये हैं। उर्मिला सनावर नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार है। इससे पहले उर्मिला सनावर का नार्को टेस्ट हो पाता,उसे किसी मामले में जेल में डाल दिया है।
माननीय गृहमंत्री जी दुष्यंत गौतम को सीबीआई द्वारा पूछताछ करने से पहले भारत सरकार द्वारा उन्हें सिक्किम का राज्यपाल मनोनीत कर दिया गया है। संवैधानिक पद होने के कारण सीबीआई दुष्यंत कुमार गौतम जी को जांच के लिए नहीं बुला सकती हैं। भारत सरकार ने ,आपकी सरकार ने उन्हें राज्यपाल बनाकर सुरक्षा कवच पहना दिया है, इससे पहले उत्तराखंड की माननीय पुष्कर सिंह धामी जी की सरकार ने जिस कमरे में अंकिता भंडारी रहती थी उसको बुलडोजर से ढहा दिया गया है।
हत्याकांड में शामिल आरोपियों के मोबाइलों की जांच नहीं की गई। जिसके कारण उत्तराखंड ही नहीं देश की जनता में यह संदेश जा रहा है कि भारत सरकार उत्तराखंड सरकार अंकिता भंडारी हत्याकांड में तथाकथित वीवीआईपी को बचा रही है।माननीय गृहमंत्री अमित शाह जी से ऐसे समय में जब अंकिता भंडारी के माता-पिता दिल्ली में धरने पर बैठे हैं, उत्तराखंड की जनता आंदोलित है ऐसे समय में आपका उत्तराखंड आगमन होने जा रहा है।
हमारा आपसे करबद्ध निवेदन है कि उत्तराखंड की धरती में पांव रखने से पहले उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े स्पेशल सर्विस मांगने वाले वीवीआईपी की पहचान नहीं हो जाती,वह सलाखों के पीछे नहीं चला जाता ,संदेह के दायरे में आने वालों को आप ,आपकी सरकार किसी प्रकार का संरक्षण देने का काम नहीं करेगी।
आपसे निवेदन है कि उत्तराखंड आने से पहले आप सिक्किम के राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम को बर्खास्त करने की कृपा करेंगे यदि आप ऐसा करते हैं तो हम आपका दिल से स्वागत करेंगे, और यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपका आगमन उत्तराखंड के जख्मों पर नमक छिड़कना जैसा होगा और हमें आपके विरोध में खड़े होने को बाध्य होंगे।
प्रभात ध्यानी राज्य आंदोलनकारी





