कर्णप्रयाग में जो हुआ वह रोड रेज की घटना थी पुलिस की जांच और अदालत का फैसला तय करेगा कि कौन दोषी था और कौन पीड़ित -(इन्द्रेश मैखुरी)

उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों में घटित घटनाओं को ऐसा मोड़ दिया जा रहा है, जिससे ये लग रहा है कि मानो ये उत्तराखंड और पंजाब के बीच में कोई संघर्ष चल रहा हो या सिखों और पहाड़ी लोगों के बीच में कोई संघर्ष चल रहा हो  I

कर्णप्रयाग में जो हुआ वह एक दुखद घटना थी, रोड रेज की घटना थी और उसमें पुलिस की तरफ से दोनों पक्षों की एफ़आइआर दर्ज कर ली गई है. दोनों तरफ की एफ़आइआर के बाद पुलिस चांच कर रही है. यह पुलिस की जांच और अदालत का फैसला तय करेगा कि कौन दोषी था और कौन पीड़ित I

नगरासू की घटना का कर्णप्रयाग के मामले से कोई संबंध नहीं था. नगरासू के गुरुदारा प्रबंधक बाबा बेअंत सिंह भी कह चुके हैं कि नगरासू की घटना का कर्णप्रयाग की घटना से कोई संबंध नहीं था I

इस प्रकरण में जिस तरह के धैर्य की ज़रूरत है, जिस तरह के संयम बरतने की ज़रूरत है, यह अफसोस की बात है कि पिछले कुछ दिनों से ऐसा धैर्य नहीं बरता गया. सोशल मीडिया का उपयोग बड़बोले बयान देने के लिए किया गया. पंजाब की तरफ से ऐसे बयान दिये गये, जो अपमानजनक थे और उत्तराखंड की तरफ से भी बहुत परिपक्व बयान नहीं दिये गए. खासतौर पर इस पूरे प्रकरण में ऑपरेशन ब्लू स्टार का जिक्र करना, बेहद अपरिपक्व किस्म का बयान है I

ऑपरेशन ब्लू स्टार कोई ऐसे शौर्य का कारनामा नहीं था कि जिसको इस तरह से शोकेस किया जाए, बल्कि पंजाब के आम लोगों ने उसकी बड़ी कीमत चुकाई , सेना ने भी और देश ने भी I

सेना के बारे में भी इस तरह कहना कि वो जैसे कोई हमारी निजी फौज हो, नासमझी है. फौज जिस भी ऑपरेशन में शामिल हुई तो किसी इलाके की होने की वजह से नहीं बल्कि इसलिए हुई क्योंकि भारत सरकार ने फौज को ये निर्देश दिया कि वो कार्यवाही करे तो फौज ने कार्यवाही की I

उसको किसी निजी शौर्य की तरह पेश करना, अपने आप में बहुत अपरिपक्क सोच है. ये निविदन करना है कि जो भी लोग ये समझते हैं कि उनको भविष्य में इस राज्य की कमान अपने हाथ में लेनी है तो उनको उसी तरह जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए I

इस मामले में जिस तरह की दूरदर्शिता की अपेक्षा उत्तराखंड की सरकार से थी, उसमें सरकार विफल रही. हर मामले में जेहाद रटने वाली धामी सरकार के सामने जब वास्तविक चुनौती आई तो उससे निपटने में नाकाम रही और इसके चलते हालात बिगड़े I

पुनः यह अपील है कि इस मामले में घृणा और हिंसा फैलाने के बजाय संयम का, धैर्य का परिचय दें. हम अलग-अलग प्रदेश के रहने वाले हैं, अलग-अलग धर्म को मानने वाले हैं पर हम इस देश के नागरिक भी हैं और किसी भी फूट से देश कमजोर होता है I

अगले साल पंजाब और उत्तराखंड में विधानसभा के चुनाव होने हैं. किसी को जनता के बीच फूट और ध्रुवीकरण का चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं करने दिया जाना चाहिए ।
इन्द्रेश मैखुरी

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