“जाति ऐसा दैत्य है, जो आपका रास्ता रोके खड़ा है. आप राजनीतिक सुधार नहीं कर सकते, आप आर्थिक सुधार नहीं कर सकते, जब तक कि इस दैत्य का खात्मा नहीं करते।”
1936 में लिखे जाति उन्मूलन (annihilation of caste) शीर्षक वाले निबंध में डॉ. अंबेडकर की ये पंक्तियां आज भी हकीकत है. जातिवाद का यह भारी- भरकम, निर्दयी, क्रूर ढांचा आज भी एक समाज के तौर पर आगे बढ़ने की हमारी राह में अड़ कर खड़ा है।
जाति, जातीय भेदभाव, उससे उत्पन्न स्थितियों और आगे के रास्ते को लेकर कल 30 जून को चमोली जिले के मुख्यालय – गोपेश्वर में दलित अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया. अंबेडकर विचार मंच और भाकपा (माले) की पहल पर यह आयोजन हुआ.साथी अतुल सती ने कार्यक्रम का संदर्भ वक्तव्य रखा।
केतन की हत्या, जोशीमठ के प्रभावितों की पीड़ा, उत्तराखंड में पिछले कुछ सालों में हुई दलित उत्पीड़न की घटनाओं, दलित विमर्श आदि बहुत से सवालों पर गहन चर्चा हुई।
छात्र- युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, राजनीतिक- सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरी चर्चा में गहनता से भागीदारी की.चर्चा में शामिल सभी लोगों ने बहुत बेबाक तरीके से अपनी बातें रखीं, अपनी पीड़ा और अनुभव साझा किए। साढ़े चार घंटे तक कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सभी वक्ताओं को धैर्यपूर्वक सुना।
आगे भी यह संवाद-चर्चा-विमर्श जारी रहेगा अन्य स्थानों पर भी ऐसे संवाद आयोजित किये जाएंगे और केतन के न्याय की लड़ाई भी जारी रहेगी, इस संकल्प और संदेश के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के काफी सारे वीडियो साथी अतुल सती जी की फेसबुक वॉल पर लाइव के रूप में मौजूद हैं, वहां देखे जा सकते हैं।

