इमरजेंसी तो देश की अखंडता और एकता के हित में संवैधानिक मर्यादाओं की सीमा में थी -( विक्रम रमोला )

अभी जो लोग आपातकाल को एनसीईआरटी की किताब में एक जरूरी अध्याय के रूप में समायोजित करने का शोर शराबा कर रहे हैं ने शायद NCERT के कक्षा 12 की किताब ही नहीँ देखी, पढ़ना तो दूर की बात है… जिसमें बाकायदा “Emergency” पर एक चैप्टर है, जिसमें इमरजेंसी की पूरी घटनायें वर्णित है, सबसे बड़ी बात यह है कि ये चैप्टर कांग्रेस के कार्यकाल में introduce किया गया |
विचार कीजिये बीजेपी में इतना नैतिक चरित्र या राजनैतिक आत्मबल है कि 2014-26 के बीच की दर्जनों शोषण, अत्यचार, व्यविचार, भ्रष्टाचार अथवा मणिपुर की त्रासदी किसी पाठ्यक्रम में introduce कर दे |संभव ही नहीँ है |

इस पर आज नरेन्द्रमोदी का संविधान पर सर झुकाने का अभिनय करते एक इस्तिहार सरकारी खर्चे पर व्यक्तिगत प्रतिद्वँदिता का प्रदर्शन करते छपा दिखाया जा रहा है, जिसमें इंदिरा जी की छवि धूमिल करने की कुचेष्टा प्रदर्शित है |

कुपढ़ो की जमात का महानायक शायद यह भूल गया कि इमरजेंसी के समय आरएसएस और बाला साहब देवरस उस समय क्या कर रहे थे |इमरजेंसी की तारीफ और इंदिरा जी की सुप्रीम कोर्ट से जीत पर उन्हें बधाई के ख़त लिख रहे थे |और इमरजेंसी का समर्थन कर रहे थे |ठीक वैसे ही जैसे अंग्रेजों के लिए मुखबरी, माफ़ीनामें आदि -आदि | इमरजेंसी के समय इंटेलीजेंस का आरएसएस के सम्बन्ध में एक नोट अटैच है… देवरस संघ प्रमुख का इमरजेंसी पर सहमति वाला पत्र तो अलग से है ही….|कोई ईमान धर्म और नैतिकता बची नहीँ है |भगवान राम की चोरी से परहेज नहीँ है तो फिर क्या कहें? कहते हैं डाइन भी एक घर छोड़ देती है, ये शख्स तो डाइन से भी बदतर निकला, जो उसी जनता को डस रहा जिन्होंने कुर्सी पर बैठाया |

वह इमरजेंसी तो देश की अखंडता और एकता के हित में संवैधानिक मर्यादाओं की सीमा में थी, किन्तु वर्तमान अघोषित इमरजेंसी देश में जो चल रही है जिसमें वोट चोरी से चढ़ावा चोरी, बालात्कारियों के संरक्षण से लेकर एपस्टिन फ़ाइल के कारनामें, इलेक्टोरल बॉन्ड से PMCare तक नियोजित भ्रष्टाचार, सवाल करने वालों पर देश द्रोह,ईडी, सीबीआई…संवैधानिक मर्यादा का हरण का क्या?

विक्रम रमोला

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