तुम्हारा हुक्म था कि घर उजाड़ दिए जाएं, अब यह भी बता दीजिए ये बेघर जाएं तो जाएं कहां!

तुम्हारा हुक्म था कि घर उजाड़ दिए जाएं, मगर यह तो बताते कि ये बेघर बच्चे आखिर कहां जाएं?

उत्तर प्रदेश की देखा देखी अब राजस्थान में भी घर उजाड़ने का चलन शुरू हो चुका है। बाड़मेर से सामने आई तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि उन गरीब, भील और आदिवासी परिवारों के दर्द की कहानी है जिनके सिर से छत छीन ली गई।

एक मासूम बच्ची अपने आशियाने को बचाने की बेबस कोशिश कर रही है, और यह दृश्य हर संवेदनशील इंसान का दिल झकझोर देता है।

यदि प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक थी, तो क्या प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं थी? आखिर इन मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का क्या कसूर है कि उन्हें खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने के लिए मजबूर कर दिया जाए?

प्रदेश सरकार और प्रशासन को इस मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए तथा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सहायता की तत्काल व्यवस्था करनी चाहिए। विकास और कानून का पालन जरूरी है, लेकिन मानवीय संवेदनाएं उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हैं।

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