“तिलचट्टा” – भारत जैसे लोकतंत्र का दावा करने वाले इस देश में पेपर लीक होना क्या दर्शाता है! हम इस संसार को कौन-सा गुरुत्व दे रहे हैं। (डॉ. प्रभात उप्रेती)

आज सारी दुनिया में तानाशाह मानसिकताओं वाले राजनेताओं ने लोकतंत्र का नाम लेकर सारे विश्व में युद्ध का तांडव छेड़ा है, जिसमें हजारों बच्चे, बूढ़े, नौजवान मारे जा रहे हैं। वहीं, हमारे देश की राजनीति में ‘कॉकरोच’ चर्चा में है। भारत के मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी पर कॉकरोच व्यंग्यपूर्ण अंदाज में वायरल हो गया। टिप्पणी थी कि कई नौजवान कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता। इनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया में, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं, कुछ दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन जाते हैं, और फिर वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।

वैसे, मुझे भी कॉकरोच से एलर्जी सी हो जाती है। कभी जब यह उल्टा जाता है तो मैं हिंदू होने के कारण इसके उल्टा हो जाने की छटपटाहट को टॉलरेट नहीं कर पाता। इसे सीधा कर देता हूं। इसके सिर पर एंटीना देखकर भी एलर्जी होती है।

लड़कियों की बहुत-सी अदाओं में एक अदा यह भी मानी जाती है कि वह कॉकरोच या छिपकली को देखकर डर जाती हैं, तब उसका प्रेमी उसे उससे बचाता है। मगर एक लड़की का प्रेमी युवा खुद ही कॉकरोच देखकर उछल-कूद कर भागने लगा। बस क्या था, मोहब्बत वहीं खत्म हो गई।

कॉकरोच मरता भी बहुत मुश्किल से है। सुना है एटॉमिक रेडिएशन का भी इस पर असर नहीं होता। यह करोड़ों सालों से चर्चा में है। सीजीआई का दिया नाम 30 साल के अभिजीत दीपके को इतना पसंद आया कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ही बना ली। और यह नाम बेरोजगारों और स्टूडेंट्स को इस कदर भाया कि दो करोड़ से ज्यादा इस दल के सदस्य हो गए। युवा बोले, ‘हां, मैं हूं कॉकरोच।’ इससे सत्ता दल को अपने अस्तित्व पर खतरे का भी एहसास होने लगा, वरना सारे देश में तो उसका ही वर्चस्व है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने आगाज़ किया पेपर लीक पर आवाज बुलंद कर। 6 जून को जंतर मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया, मांग थी केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। आमंत्रण में इतनी भीड़ की आशंका हुई कि यूएस में रह रहे अभिजीत को अपील करनी पड़ी कि छात्र उनसे मिलने दिल्ली एयरपोर्ट ना आएं, अव्यवस्था हो सकती है। जंतर-मंतर पर आएं, जिससे सिक्योरिटी वालों को तकलीफ ना हो। पूरे मनोवैज्ञानिक अंदाज में जमावड़ा बिछाया गया। अपनी अपील में उन्होंने सिक्योरिटी वालों की आत्मा को भी स्पर्श किया कि उनके बच्चे भी परीक्षा दे रहे होंगे। जंतर-मंतर में पुरानी चोट खाए लद्दाख के वांगचुक भी आमंत्रित थे, जिन्होंने माहौल बनाने में मदद की। वातावरण बना। सरकार ने भी प्रदर्शन की इजाजत दी। सोशल मीडिया की ताकत को शायद वह भी आंकना चाहती थी।

‘पेपर लीक का जवाब, कॉकरोच जिंदाबाद’… इस नारे के साथ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का इंटरनेट आंदोलन राजधानी की सड़क पर उतरा। भारी पुलिस बल की मौजूदगी और पसीना टपक ने वाले तेज गर्मी में जंतर मंतर में भारी भीड़ जमी। कई विरोध करने पहुंचे, कई सपोर्ट करने तो कई लोगों को उत्सुकता खींच ले आयी। ‘कॉकरोच’ मास्क लगाए एक प्रदर्शनकारी लोले, हां, मैं कॉकरोच हूं मगर बनाया किसने? आपके सिस्टम ने, जहां पेपर लीक होते हैं, परीक्षा रद्द हो जाती है, भर्तियों के विज्ञापन आते हैं मगर एग्जाम डेट नहीं आती और अब तो 12वीं की बोर्ड परीक्षा की कॉपियां भी ठीक से चेक नहीं हो पाती। एक टीनएजर ‘कॉकरोच’ बोले, कॉकरोच बहुत मजबूत होता है, उसी की तरह हम भी अरप्ट सिस्टम के खिलाफ टिके रहेंगे। Gen Z जानना चाहता कि हम कैसे विश्व गुरु हैं जहां एजुकेशन सिस्टम ही फेल हो रहा है। हमें धर्म, प्रोपागैंडा में कोई दिलचस्पी नहीं।

अब बात पेपर लीक की। यह तो हद ही हो गई कि नीट, एसएससी जैसी कितनी ही प्रतियोगी परीक्षाओं में कितनी ही बार पेपर लीक होने का मामला सामने आया है। मुझे आश्चर्य हो रहा था कि यह पेपर कैसे लीक होते हैं, जिसे बड़े-बड़े अधिकारियों के नेतृत्व में बड़ी-बड़ी एजेंसी ऑर्गेनाइज करती हैं। साफ है कि मामला शातिर स्थापित गैंग, ऑर्गेनाइज्ड माफिया द्वारा ही कराया जाता होगा! एक आंकड़ा कहता है कि 10 साल में 85 से ज्यादा पेपर लीक हुए हैं।

पेपर लीक पर प्रश्न करने पर भी सत्ता की नाक लग जाती है। यह कैसा लोकतंत्र है, जहां सवाल करना भी गुस्ताखी है। कॉकरोच जनता दल की फॉलोइंग और सदस्य संख्या देखकर सत्ता पक्ष घबरा गया है। सिक्योरिटी भी खूब लगाई है।

-डा0 प्रभात उप्रेती

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