सुंदरढूंगा और मैकतोली हो सकते हैं बागेश्वर के महत्वपूर्ण साहसिक पर्यटन स्थल

बागेश्वर जनपद में बिचला तथा मल्ला दानपुर का वृहद क्षेत्र हिमालय की विश्व विख्यात नंदा पीक पर्वत श्रंखला से सटा हुआ है। उत्तराखंड सरकार और बागेश्वर प्रशासन ने ईमानदारी से प्रयास किए होते तो राज्य बनने के 25 वर्षों के अंदर दानपुर का यह भूभाग विश्व विख्यात पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो चुका होता।

सरकार द्वारा इस वृहत क्षेत्र में किसी भी प्रकार के सकारात्मक प्रयास नहीं किए गए, यही वजह है कि एक महत्वपूर्ण संभावित पर्यटन स्थल वह मुकाम हासिल नहीं कर पा रहा है जिस मुकाम पर इस पर्यटन स्थल ने स्थापित होना चाहिए था।

सुंदरढूंगा के नाम से विख्यात मल्लादनपुर का यह क्षेत्र इतना अधिक लुभावना है कि पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींच लेता है। यदि प्रशासन थोड़ा भी प्रयास करें तो सुंदर दूंगा के कई स्थान स्थाई रूप से पर्यटकों के लिए खोले जा सकते हैं।

पिंडारी और सुंदर ढुंगा तक पहुंचने के लिए अंतिम गांव खाती है। घशखाती गांव तक वाहन यातायात के मार्ग बने हुए हैं तथा नियमित रूप से वाहन भी मिलते हैं। खाती से सुंदर दूंगा जाने के लिए 7 किलोमीटर दूरी पर जातोली गांव मिलता है । जातोली से आगे आबादी वाला क्षेत्र समाप्त हो जाता है। जातोली से करीब 14 किलोमीटर पर कठलिया पड़ता है। कठलिया में अलग-अलग दिशाओं से बहकर आ रही छोटी-छोटी जल धाराओं का संगम है। इसी संगम से अलग-अलग दिशाओं में मैकतोली, बैलूनी टॉप, सुखराम गुफा और देवी कुण्ड के लिए रास्ते खुलते हैं। खाती गांव में क्षेत्रीय स्तर पर इन सभी स्थानो तक पहुंचने के लिए पौटर तथा क्षेत्रीय गाइड मिल जाते हैं।

विगत 3 वर्ष पूर्व देवी कुंड के समीप एक दुर्घटना में बर्फ की चट्टान फिसलने की वजह से पांच लोगों की मृत्यु हो गई थी। तब जिला प्रशासन का ध्यान सुंदरढूंगा की ओर गया। वन विभाग को हिदायत दी गई कि जो भी पर्यटक ऊपर जाते हैं वह वन विभाग में अपना पंजीकरण करवाएंगे। विगत वर्ष लोक निर्माण विभाग द्वारा 98 लाख रुपए का एक प्रपोजल ढुंगिया डौन से कठलिया तक चट्टानी रास्तों के निर्माण हेतु तैयार किया गया था। जब टेंडर उठाए गए तब सबसे कम 65 लाख रुपए की बोली लगाने वाले ठेकेदार को काम मिलना ही था। सुनने में आ रहा है कि 65 लाख रुपए का काम पूर्ण होना दिखा दिया गया है ।

क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश है कि जहां आसानी से पैदल चला जा सकता था वहां तो विभाग द्वारा खड़ंजा नुमा काम करवा दिया गया है, लेकिन जिन चट्टानी क्षेत्रों में चट्टानों को काटकर मार्ग तैयार किया जाना था उस क्षेत्र में मार्ग का निर्माण कार्य छोड़ दिया गया है। जिस चट्टानी क्षेत्र में मार्ग का निर्माण बहुत आवश्यक था, उस क्षेत्र को क्यों छोड़ दिया गया के विषय में जिला प्रशासन द्वारा भी विभागीय अभियंताओं से कोई सवाल नहीं पूछा जा रहा है, तो क्यों?

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