विकास के नाम पर लोगों को उजाड़ने और डुबोने वाला विकास का मॉडल कॉरपोरेट और बड़े ठेकेदारों के विकास का मॉडल है

भाकपा (माले) के प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून जिले के जौनसार क्षेत्र के किशाऊ बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांव क्वाणु का दौरा किया और गांव को डुबोये जाने और विस्थापन का विरोध कर रहे ग्रामीणों के साथ एकजुटता जाहिर की.
ग्रामीणों ने कहा कि इस प्रक्रिया के शुरू होने से बहुत पहले वे उत्तराखंड जल विद्युत निगम के अधिकारियों को अपनी चिंताओं से अवगत करा चुके थे, निगम के अफसरों ने उनको सकारात्मक कार्यवाही का भरोसा दिया था, लेकिन अचानक बांध बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी और उनके तमाम सुझावों व चिंताओं को अनसुना कर दिया गया. उनकी बहुत उपजाऊ खेती है, मक्के और टमाटर की फसल दिल्ली की मंडी तक जाती है. लेकिन यह सब डुबोने की तैयारी बांध के नाम पर की जा रही, लेकिन ग्रामीण इसे किसी सूरत में नहीं होने देंगे.
भाकपा (माले) के गढ़वाल सचिव और जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक कॉमरेड अतुल सती ने जोशीमठ के संघर्षशील लोगों की तरफ से क्वाणु के ग्रामीणों के साथ एकजुटता जाहिर की. उन्होंने कहा कि जोशीमठ क्षेत्र में जल विद्युत परियोजनाओं और उनसे होने वाली तबाही के खिलाफ वे पिछले दो दशक से अधिक समय से संघर्ष कर रहे हैं. इसलिए परियोजनाओं से होने वाली तबाही और उसकी पीड़ा को समझते हुए वे क्वाणु के लोगों के संघर्ष में साझीदार होने आये हैं. जल- जंगल- जमीन समेत तमाम संसाधनों के डुबोये जाने और लोगों को उजाड़े जाने के खिलाफ संघर्ष सभी का साझा संघर्ष है.
भाकपा (माले) के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखुरी ने कहा कि विकास के नाम पर लोगों को उजाड़ने और डुबोने वाला विकास का मॉडल कॉरपोरेट और बड़े ठेकेदारों के विकास का मॉडल है, जिसके लाभार्थी सत्ताधारी बनते हैं. उन्होंने कहा कि प्रकृति, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के लिए यह विनाशकारी मॉडल है. राज्य के ऊर्जा सचिव खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उत्तराखंड के पास ना तो लोगों को बसाने के लिए जमीन है और ना ही प्रतिपूरक वृक्षारोपण के लिए. इसके बावजूद सिर्फ केंद्रीय गृह मंत्री के दबाव में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने इस परियोजना के लिए हामी भर दी. यह डबल इंजन की मार है, जिसे क्वाणु समेत उत्तराखंड के उन तमाम गांवों के लोग झेलेंगे, जो इस परियोजना से डूबेंगे और उजड़ेंगे.
क्वाणु के ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह स्याणा सुरेंद्र सिंह चौहान, कोटा के प्रधान वीरेंद्र वर्मा, भगत राम जोशी, सरदार सिंह, मोर सिंह, नरेंद्र राणा आदि ग्रामीणों ने किशाऊ बांध परियोजना के लिए अपने गांव को डुबोने और उजाड़े जाने के विरुद्ध संघर्ष करने के प्रति कटिबद्धता जाहिर की
इन्द्रेश मैखुरी

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