कैग ने मार्च में विधानसभा में पेश रिपोर्ट में हज़ारों करोड़ रुपए की गड़बड़ियां चिन्हित की पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

हरिद्वार नगर निगम जमीन खरीद घोटाले में आईएएस वरुण चौधरी की सेवा समाप्ति और पूर्व जिलाधिकारी करमेंद्र सिंह को दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) और पीसीएस अजयवीर सिंह को लघु शास्ति और तीन वेतन वृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया है।

यह बड़ी लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ सेलेक्टिव कार्यवाही है, हरिद्वार में तो 15 करोड़ की जमीन 55 करोड़ रुपए में खरीदे जाने का मामला है , एनएच 74 का घोटाला तो 500 करोड़ रुपए का है, लेकिन उसके मुख्य आरोपी के खिलाफ इसी सरकार ने मुकदमा चलाने की अनुमति निरस्त करने का आदेश अदालत में दाखिल कियाए वो अलग बात है कि अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया । इस घोटाले के सारे आरोपी न केवल जमानत पर बाहर आ गए बल्कि प्रमोशन भी पा गए ।

कैग की मार्च में विधानसभा में पेश रिपोर्ट में हज़ारों करोड़ रुपए की गड़बड़ियां चिन्हित की पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। इन्द्रेश मैखुरी

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