जातीय उच्चता के दम्भ का इतना अमानवीय होना तो मनुष्य होने पर भी सवाल खड़ा करता है: चारू तिवारी

टिहरी जनपद के प्रतापनगर क्षेत्र में एक दलित युवक केतन लाल की हत्या ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि उत्तराखंड में जातीयता का जहर बहुत गहरे तक है। युवक की जिस तरह पीट-पीटकर हत्या की गई और बहुत अमानवीय तरीके से उसके पांवों में कील गाढ़ने और नाखून उखाड़ने तक की बात कही जा रही है, यह सभ्य समाज को शर्मसार करने वाली है। अपेक्षाकृत शांत माने जाने वाले पहाड़ में जिस तरह से युवक केतन लाल की हत्या की गई है, वह लगातार संवेदनहीन होते समाज के चरित्र को भी बताता है। इस दलित युवक का कसूर मात्र यह था कि वह एक सवर्ण लड़की से बातचीत या प्यार करता था। दोनों नाबालिग हैं। इस बात को मानने में अब हमें ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए कि इस तरह की घटनाओं में समाज में बहुत गहरे तक धंसे जातीय उच्चता के दंभ भी महत्वपूर्ण कारण हैं।

तीन साल पहले जब अल्मोड़ा जनपद के सल्ट विकासखंड के पनवाद्योखन निवासी सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश की हत्या हुई थी तो मैंने ‘नवभारत टाइम्स’ में एक लेख लिखा था, जिसमें उत्तराखंड में जातीय दंभ के कारण हुई हत्याओं का जिक्र किया था। जगदीश का अपराध यह था कि उसने मानवीय संवेदनाओं के चलते एक सवर्ण लड़की को सौतेल बाप और भाई से मुक्त करने के लिए उससे शादी की। जगदीश उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी का कार्यकर्ता था और दो बार सल्ट से विधानसभा का चुनाव लड़ चुका था। इस बीच उसकी मुलाकात गीता (गुड्डी) से हुई जो सवर्ण लड़की थी। जगदीश ने गीता की मां की सहमति से 21 अगस्त, 2022 को मंदिर में उससे शादी कर ली। यह बात लड़की के सौतेले परिजनों को नागवार गुजरी और 1 सितंबर, 2023 को जब जगदीश एक प्रदर्शन में शामिल होने नैनीताल जा रहा था तो भिकियासैंण में उसका अपहरण कर दोनों बाप-बेटों जोगा सिंह और गोबिंद सिंह ने उसकी हत्या कर दी। जगदीश को भी बहुत अमानवीय तरीके से मारा गया था।

अब टिहरी में दलित युवक केतन लाल को धोखे से घर में बुलाकर जिस तरह से बहुत क्रूरता के साथ मारा गया, उससे मानवता सिहर उठी। उसके अंतिम समय में आए वीडियो बताते हैं कि किस तरह का पशुवत व्यवहार उसके साथ किया गया। जो खबरें सामने आ रही हैं, उनके अनुसार एक नाबालिक लड़की जो सवर्ण समाज से आती है, उसका एक दलित लड़के से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क था, या वे एक-दूसरे को प्यार करते थे। यह खबर जब लड़की के परिवार वालों को लगी तो उन्होंने लड़की के फोन से ही लड़के को बुलाया। जब वह अपने एक साथी के साथ मोटर साइकिल में लड़की के गांव गया तो पहले से ही घात लगाये उसके परिजनों ने लड़के और उसके दोस्त की पिटाई कर दी, जिसमें लडके के साथ इतनी क्रूरता की कई कि उसकी मौत हो गई और उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया।

उत्तराखंड में लगभग हर वर्ष दलितों के साथ इस तरह की घटनाएं अलग-अलग रूपों में घटित होती रहती हैं। इनमें मानसिक उत्पीड़न, बलात्कार, मारपीट और हत्याएं शामिल हैं। राज्य बनने के बाद के आंकड़ों को देखें तो दलित उत्पीड़न की औसतन 300 घटनाएं हर वर्ष दर्ज होती हैं। ऐसे मामलों की बड़ी संख्या है, जो पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते। टिहरी में युवक कही हत्या के बाद यह समझना जरूरी है कि अपेक्षाकृत शांत समझे जाने वाले पहाड़ में जातीयता का यह दंभ इतने वीभत्स रूप में कैसे परिवर्तित हो रहा है। ऐसा नहीं है कि पहले यहां ऐसी घटनाएं नहीं होती थी या जातीयता का जहर नहीं फैला था। इसका एक बड़ा रूप कभी 1980 में अल्मोड़ा जनपद के कफल्टा में 14 दलित बारातियों की हत्या के रूप में हम देख चुके हैं। पिछले समय में इस तरह की कई घटनाएं कई जगह होत-होते बची हैं। यह सिलसिला काफी लंबा है। अगर पिछले कुछ वर्षो की ही घटनाओं को देखें तो यह साफ हो जाता है कि राज्य में दलितों के साथ हो रहे अत्याचार किस स्तर तक पहुंच चुके हैं।

  • वर्ष 2016 में बागेश्वर जिले के एक सवर्ण शिक्षक ने सोहन राम नाम के दलित का सिर इसलिए काट दिया कि उसने सवर्ण की चक्की को हाथ लगा दिया था।
  • वर्ष 2019 में गढ़वाल मंडल के टिहरी जनपद के गांव श्रीकोट में एक दलित युवक जितेंद्र दास की इसलिए हत्या कर दी कि वह एक बारात में सवर्णों के साथ कुर्सी में बैठकर खाना खाने लगा।
  • 28 नवंबर, 2021 को चंपावत जनपद के देवीधुरा के पास ग्राम केदारनाथ में दर्जी का काम करने वाले दलित युवक रमेश राम की हत्या इसलिए कर दी गई कि उसने सवर्णों की बारात में अपने हाथ से खाना निकाला।
  • सितंबर, 2021 को चंपावत जिले के एक सरकारी स्कूल सूखीढांग में सवर्ण बच्चों ने दलित महिला सुनीता देवी के हाथ का पका मिड-डे मील खाने से इंकार कर दिया था।
  • नैनीताल जनपदके ओखलकांडा ब्लाॅक के बुमका गांव में बने क्वारंटाइन सेंटर में सवर्ण युवकों ने दलित के हाथ का बना खाना नहीं खाया।
  • चंपावत जिले के चैकी गांव में 16 मई 2023 को दलित युवती बबीता विश्वकर्मा की हत्या उसके प्रेमी कथावाचक गौरव पांडे ने उसकी चुन्नी से गला घोटकर कर दी।
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