उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ने भले ही अपने वजूद को समाप्त कर लिया है लेकिन पिछले दो चुनावों में कांग्रेस को जितना नुकसान आम आदमी पार्टी पहुंचा सकती थी उसने पहुंचाया ही था। कांग्रेस को पहुंच गए राजनीतिक नुकसान का सीधा-सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलना ही था तो मिला भी।
पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ खड़े जितने भी नेता और कार्यकर्ता थे या जितने भी लोग आप के टिकट पर चुनाव लड़े उनमें से एक दो को छोड़कर सभी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी ने उनको सम्मानजनक रूप से पद प्रतिष्ठा दे कर पुचकारा ही है।
2027 के चुनाव में उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी सभी 70 सीटों पर भी अपने प्रत्याशी उतरती ले तब भी वह 6000 वोट भी नहीं पा सकेगी यह बात भारतीय जनता पार्टी भी जानती है और आम आदमी पार्टी भी समझती है। एसे में 2027 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी आम आदमी पार्टी के भरोसे हाथ पर हाथ धर कर बैठी नहीं रहेगी।
उत्तराखंड में वोट कटुए के रूप में आम आदमी पार्टी का जनाधार समाप्त होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी को यह चिंता भी सता ही रही है कि सरकार के खिलाफ उभर रही एंटी इनकैम्वेंसी को कांग्रेस अपनी ओर न खींच ले। भारतीय जनता पार्टी सरकार की नीतियों की वजह से नाराज वोटो को कांग्रेस की ओर न जाने देने के सभी उपाय भी कर ही रही है।
भाजपा के लिए संतोष प्रद यह हो सकता है कि सरकार के खिलाफ आक्रोशित वोट अपनी ओर खींचने की जगह कांग्रेस के लोग किस सीट पर किसको टिकट मिले के जुगाड़ों में ही उलझे हुए हैं।
उत्तराखंड से बाहर निकलते हैं तो पंजाब में आम आदमी पार्टी जितना नुकसान कांग्रेस को पहुंचा सकती थी वह पहुंचा चुकी है।
आज की तारीख में राहुल राज्यों में कांग्रेस को क्षति पहुंचाने वाले क्षेत्रीय संगठनों को तवज्जो भी नहीं दे रहे हैं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी अगर छोटे से विपक्ष के रूप में सिमट गई है तो वजह कांग्रेस पार्टी ही थी जिसने हर सीट पर अपना प्रत्याशी खड़ा किया । इधर आम आदमी पार्टी मानने लगी है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पंजाब में फिर से कांग्रेस स्थापित हो जाएगी।
अभी अचानक कॉकरोच शब्द का उभरना, फिर काकरोच पार्टी का बनना, कॉकरोच पार्टी के इर्द-गिर्द उन चेहरों का सिमटना जो किसी न किसी रूप में नरेंद्र मोदी की तारीफ करते रहे हैं या फिर आम आदमी पार्टी के समीप रहे हैं को उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश के चुनाव के रूप में देखना तो जल्दबाजी ही होगी। जल्दबाजी यह मानना भी होगी कि कॉकरोच कांग्रेस से पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अडानी के साम्राज्यवाद के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन को छीन लेंगे
विश्लेषकों ने इस बात को भी स्वीकार कर लिया है कि कॉकरोचों का उदय. जंतर मंतर में भीड़ का इकट्ठा होना कांग्रेस और कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे हैं आंदोलन को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं कर रहा है। यह विशलेषण कॉकरोच और गैर कांग्रेसी संगटनों को को भी परेशान कर ही रही होगा कांग्रेस की ओ आकर्शित हो रहे जेन जैड को कैसे राका जाए।




