भारत सरकार ने उत्तराखण्ड में स्थापित इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को लुटाया कौड़ियों के भाव

1976 -77 में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री रहते हुए नरायन दत्त तिवारी ने अल्मोड़ा जनपद के मोहान क्षेत्र में पहाड़ के विकास के लिए इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड नाम से एक औद्योगिक रचना को जमीन पर उतरा था।

उत्तराखंड में सार्वजनिक क्षेत्र का यह प्रतिष्ठान कभी भी घाटे में नहीं गया । जो भी मुनाफा इस संस्थान ने कमाया उस मुनाफे का केंद्र सरकार का हिस्सा केंद्र सरकार को जाता रहा है। इस प्रतिष्ठा के लेखे-जोखों के अनुसार इस कंपनी का नेटवर्थ 143 करोड़ रूपया है। जबरदस्त विरोध के बावजूद इसी महीने भारत सरकार ने यह कंपनी भारतीय जनता पार्टी के करीबी नाम चीन स्काइ मैप कम्पनी के मालिकों को 121 करोड़ रुपयों में लुटा दी है।

यहां उल्लेख इस बात का भी किया ही जाना चाहिए कि खरीदार के लिए यह प्रतिष्ठान सिर्फ मुनाफा देने वाली कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि इस प्रतिष्ठा के नाम पर दर्ज 40 एकड़ जमीन भुगतान की गई कीमत से भी कहीं अधिक कीमती है। 1978 में इस कंपनी को स्थापित करने के लिए वन विभाग की 40 एकड़ जमीन भारत सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई गई थी।

जिस निजी समूह ने औने-पौने दामों पर इस कंपनी को खरीद लिया है उस समूह ने सिर्फ कंपनी को नहीं खरीदा है बल्कि भुगतान की गई राशि से कयी गुना अधिक कीमती जमीन पर भी हाथ साफ करने में सफलता हासिल कर ली है।

आज की तारीख में उत्तराखंड पूछ रहा है कि इस कंपनी को खरीदने वाली स्काई मैप कंपनी के मालिक संजय गुप्ता कौन है? सूत्रों के अनुसार संजय गुप्ता के मामा रामलाल अग्रवाल आरएसएस के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख हैं । यदि सूत्रों का कथन सत्य है तो संजय गुप्ता देश के उन लोगों में है जो बिना दीवार बिना अपॉइंटमेंट के प्रधानमंत्री से कभी भी मिल ही सकते हैं।

उत्तराखंड सरकार की ओर से इस खरीद फरोख्त पर अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है लेकिन उत्तराखंड की विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस कंपनी को औने-पौने दामों में बेचे जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह खरीद फरोख्त अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है ।

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया है कि जब कर्मचारी संघ ने 18.05.2026 को ही कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सरकार से मिलने का समय मांगा था, तब उनकी बात क्यों नहीं सुनी गई? क्या कर्मचारियों की आशंकाओं और भविष्य को नजरअंदाज करना ही सरकार की नीति बन गई है?
श्री आर्या ने कहा है कि सरकार को प्रदेश की जनता और कर्मचारियों के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि क्या कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रहेगी? वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के अधिकार और भविष्य की गारंटी क्या होगी ? क्या निजीकरण के बाद कर्मचारियों का शोषण नहीं होगा? क्या उत्तराखण्ड की इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक इकाई को बचाने का कोई रोडमैप है?

नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा है कि सरकार ने कर्मचारियों, स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों से कोई संवाद क्यों नहीं किया?

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने घोषणा की है कि हम आईएमपीसीएल के कर्मचारियों की न्यायसंगत मांगों के साथ मजबूती से खड़े हैं और सरकार से मांग करते हैं कि कर्मचारी संघ को तत्काल वार्ता का समय दिया जाए तथा कर्मचारियों के हितों, रोजगार सुरक्षा और संस्थान के भविष्य को लेकर स्पष्ट आश्वासन दिया जाए।

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