पत्रकार हेम भट्ट और उनके परिवार से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री और एसटीएफ के एसएसपी के बीच हुई बातचीत से प्रतीत हुआ कि हेम भट्ट के विरुद्ध ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके लिए पुलिस तड़के चार बजे उनके घर में घुस कर उन्हें उठा लाई । यही से सवाल उठता है, कि पुलिस ने क्यों और किसके कहने पर ऐसा उत्पीड़नकारी कारनामा अंजाम दिया?
क्या मुख्यमंत्री के जानते-बूझते पुलिस ने इस कारनामें को अंजाम दिया या फिर पुलिस की करामात की मुख्यमंत्री को कानों-कान खबर तक नहीं हुई?
सूचना और लोकसंपर्क निदेशालय की पोस्ट के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रकरण को गंभीरता से सुनते हुए पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष एवं न्यायोचित कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि “मामले में तथ्यों के आधार पर उचित कार्यवाही करते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री हेम भट्ट को न्याय दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री के इस आश्वासन पर पत्रकार बिरादरी की ओर से एक सवाल पूछा जा रहा है कि क्या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकार हेम भट्ट को घर से उठाए जाने के मामले की अलग से मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये हैं।
-इंद्रेश मैखुरी

