राहुल गांधी की नई रणनीति कांग्रेस के छत्रपों और भारतीय जनता पार्टी को परेशान किए हुए है

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मौसम की खराबी के कारण से अल्मोड़ा और पौड़ी नहीं पहुंच पाने से भारतीय जनता पार्टी को क्षणिक राहत मिली तो है लेकिन राहुल गांधी की प्रतीक्षा में जो भीड़ अल्मोड़़ा और पौड़़ी में देखी गई से एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि कांग्रेस के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के हल्के फुल्के पेंतरे अब काम आने वाले नहीं हैं।

भारतीय जनता पार्टी द्वारा राहुल गांधी के अल्मोड़ा और पौड़ी मैं जनसंवाद के प्रस्तावित कार्यक्रम को कमजोर करने के लिए कु प्रचार किया जा रहा था कि पौड़ी और अल्मोड़ा की जनसभा तो बहाना है राहुल गांधी का मुख्य मकसद कोटद्वार में दीपक से मुलाकात करना है।

यहां यह बता दिया जाना चाहिए कि राहुल गांधी का दीपक से मिलने का कार्यक्रम कांग्रेस की ओर से घोषित नहीं था बल्कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रचारित प्रसारित ही था।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि राहुल गांधी अल्मोड़ा और पौड़ी पहुंच गए होते तो उन्हें सुनने वाले वही लोग होते जो उनकी सभा स्थल तक पहुंचे थे। राहुल गांधी के सभा स्थल तक ना पहुंच पाने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित करवाया गया राहुल गांधी का भाषण गांव गांव तक लोगों ने सुना ।

विश्लेषक यह भी मान रहे हैं कि राहुल गांधी के उत्तराखंड में प्रस्तावित कार्यक्रम को धूमिल करने के उद्देश्य से भूतपूर्व सैनिकों का कोई मुहल्लाई संगठन , भाजपा के कुछ नेता और भाजपा के आईटी सेल को राहुल गांधी के विरोध में उतारे जाने का जो प्रयोग किया गया वह प्रयोग भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ चला गया है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी की बढ़ती हुई कद काठी को कतरने की जितनी भी कोशिश मोदी जी के पक्ष में भारतीय जनता पार्टी द्वारा की जा रही है उन सभी कोशिशों में भारतीय जनता पार्टी को मुंह की खानी पड़ रही है।

भारतीय जनता पार्टी को यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि राहुल गांधी ने अपनी रणनीति को सिरे से बदल दिया है। राहुल गांधी जानते हैं कि जब भारतीय जनता पार्टी अरबों रुपया खर्च करके राहुल गांधी को पप्पू साबित करने की जी-तोड़ कोशिश कर रही थी तब जनपदों और प्रदेशों के स्तर पर कांग्रेस के स्थापित छत्रपों ने कभी भी राहुल गांधी को पप्पू साबित करने के भारतीय जनता पार्टी के कु प्रयासों का खुला विरोध नहीं किया और ना ही राहुल गांधी के पक्ष में मजबूत पैरवी ही इन छत्रपों कभी की।

राहुल गांधी अपनी नई रणनीति के तहत कांग्रेस की छत्रप संस्कृति पर प्रहार करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। यही वह स्थित है जो कांग्रेस के छत्रपों और भारतीय जनता पार्टी को परेशान किए हुए है।

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