कपकोट विधानसभा क्षेत्र में जनता के बीच गहरी पैठ रखने वाले नामचीन कांग्रेसी नेता आखिर पार्टी से दूरी क्यों बना रहे हैं

कपकोट की राजनीति में कांग्रेस के कई चेहरे थे जो अपने अपने क्षेत्र में सामाजिक व पंचायत राज व्यवस्था की राजनीति में महत्वपूर्ण चेहरों के रूप में स्वीकारे जाते थे। इन चेहरों की वोटो पर अच्छी पकड़ हमेशा बनी रही थी जो आज भी है। आज की तारीख में इन सभी चेहरों ने भले ही अपने आप को कांग्रेस के प्रति सक्रियता से दूर समेट लिया है लेकिन किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ भी ये चेहरे खड़े नहीं हुए हैं।

उमेद सिंह माजिला कांग्रेस का बहुत बड़ा नाम, बागेश्वर जनपद में कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बने रहने का लंबा रिकॉर्ड भी मजिला जी के नाम पर है। जब कांडा विधानसभा हुआ करती थी तब माजिला जी विधायक भी रहे। आज भी तीन-चार हजार वोटों को आसानी से प्रभावित कर सकते हैं।

नरेंद्र भोर्याल, नाकुरी पट्टी का बहुत अधिक सम्मानजनक नाम । दुग, नाकुरी और कम्स्यार पट्टियों के दर्जनों गांवों में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बड़ी पकड़। अपने अन्दाज में जनता के बीच में हमेशा सक्रिय रहते हैं। दुग, नाकुरी कामस्यार में अभी भी डेढ़-दो हजार वोटों को आसानी से प्रभावित कर लेते हैं।

दिनेश गड़िया, नाकुरी पट्टी में खनन क्षेत्र के गांवों में अच्छी पकड़ वाले सामाजिक कार्यकर्ता तथा उद्योगपति। बाफिला गांव, किरोली, सुरकाली गांव, उडियार,रीमा, बैकोड़ी, उडयूड़ा, किड़ई, पचार, महोली गांवों में जबरदस्त सामाजिक पकड़ रखते हैं।

भगवान सिंह कोरंगा, पूर्व प्रधानाचार्य इंटर कॉलेज शामा आज की तारीख में पूरे उत्तराखंड में कीवी मैन के नाम से विख्यात हैं । बिचला दानपुर के 22 गांवों में कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में सम्मानजनक तरीके से अपने नाम को बचाए हुए हैं । दो ढाई हजार वोटो को किसी के भी पक्ष में प्रभावित कर सकते हैं।

श्रीमती कुंती परिहार, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अल्मोड़ा जवाहर सिंह परिहार की धर्मपत्नी। जवाहर सिंह परिहार का मतलब होता है बागेश्वर को जनपद बनाने के लिए चले आंदोलन को अंतिम मुकाम पर सफलता दिलवाने वाला वह व्यक्ति जिसने बागेश्वर को जिला बनवाने के लिए अपनी राजनीति को दाव में लगा दिया था। जवाहर सिंह परिहार तथा श्रीमती कुंती परिहार सिर्फ 15 दिन अपने क्षेत्र में राजनीतिक रूप से भ्रमण कर लें तो भारतीय जनता पार्टी और उनके नेताओं भले ही वे भगत सिंह कोश्यारी ही क्यों ना हों में सिहरन पैदा कर सकते हैं।

किशन सिंह दानू। बहुत पुराने कांग्रेसी, बोर बलड़ा, समडर, कुआरी, बदियाकोट, खाती, सोराग, बाछम, तीख, डौला में कांग्रेस का मजबूत और बहुत पुराना स्तंभ, जिला पंचायत जैसी सीट को निर्विरोध निकालने की क्षमता रखने वाला कांग्रेस का यह कार्यकर्ता मधुर स्वभाव के बल पर सूझबूझ और तकनीकी के सहारे हजारों वोटो को प्रभावित करता है।

तेज सिंह दानू कांग्रेस का पुराना नाम। यह खांटी कांग्रेसी आंदोलनकारी के रूप में दानपुर के सम्मान के लिए कई महीने जेल काट चुका है । यह व्यक्ति यदि करमी और आसपास के गांव में 10 दिन लगातार मेहनत कर ले तो भारतीय जनता पार्टी की रातों की नींद हराम कर सकता है।

उत्तम सिंह कोश्यारी पूर्व फौजी नामती चेटा बगड़ क्षेत्र में सच्चाई के साथ खड़ा रहने वाला कांग्रेस का मजबूत सिपाही। जिस वक्त उत्तराखंड की राजनीति में इन्हीं के गांव के बहुत बड़े नेता भगत सिंह कोश्यारी की तूती बोलती थी तथा उनके क्षेत्र में खासकर कोश्यिारियों में कोई भी कांग्रेस के साथ खड़ा होना भी पसंद नहीं करता था उत्तम सिंह कोश्यारी ने कांग्रेस का सिपाही बनकर भगत सिंह कोश्यारी के भ्रम को तोड़ दिया था। उत्तम सिंह कोश्यारी अपने क्षेत्र में दो ढाई सौ वोटो को तो प्रभावित करते ही करते हैं।

इस सूची में बहुत सारे नाम और भी जोड़े जा सकते हैं जो कपकोट विधानसभा क्षेत्र के गांवों में कांग्रेस के मजबूत सिपाही हुआ करते थे तथा सामाजिक तथा पंचायती राजनैतिक कार्यकर्ता के रूप में जनता के बीच मजबूत पैठ बनाए हुए हैं।

यह तो कांग्रस ही बता सकती है कि आज की तारीख में कांग्रेस ने पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में इन सभी नामों को महत्व देना क्यों बंद कर दिया है । कांग्रेस के मजबूत सिपाहियों के रूप में दर्ज ये सभी नाम कांग्रेस को छोड़कर अन्य किसी भी दल की ओर आकर्षित नहीं हुए हैं । लेकिन सच यह भी है कि इन सभी नामों द्वारा कांग्रेस के प्रति सक्रियता रोक देने के बाद कांग्रेस कपकोट विधानसभा में अपनी प्रतिद्वन्दी पार्टी भाजपा से लगातार 8 प्रतिशत से 10प्रतिशत तक वोटो से चुनाव हार रही है ।

कपकोट विधान सभा का सिर्फ उदाहरण ही यहां दिया गया है वरना पूरे उत्तराखण्ड में हजारों नाम बिखरे हुए मिल जाएंगे जिनकी जबरदस्त पकड़ जोगों के बीच में है लेकिन कांग्रेस ने उन्हें हाशिये पर धकेले हुए है। उत्तराखण्ड में बुरी तरह से हांफ रही कांग्रेस तन्दुरुस्त होना चाहती है तो इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी और केंद्रीय कांग्रेस कमेटी ने पार्टी में स्थापित एम्पायरों की चिन्ता किये बगैर चिंतन मंथन तो करना ही चाहिए।

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