26 नवम्बर 2026 से शुरू होने वाले संघर्षों के लिए पूरे देश के किसान करेंगे तैयारी-(पुरुषोत्तम शर्मा)

नई दिल्ली के सिविक सेंटर ऑडिटोरियम में आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के अखिल भारतीय सम्मेलन ने जनसंघर्षों को पुनः आरम्भ करने का संकल्प लिया है।

यह निर्णायक जनसंघर्ष, मजदूरों, किसानों, खेत मजदूरों, छात्रों, युवाओं, महिलाओं और एनडीए शासन के तहत कॉरपोरेट हमलों का सामना कर रहे समाज के सभी तबकों के संयुक्त मंचों तथा संगठनों के साथ समन्वय में संचालित किया जाएगा। मजदूर-किसान एकता के आधार पर यह संघर्ष लंबे समय से चले आ रहे कृषि संकट और श्रम शोषण को समाप्त करने तथा आधुनिक, लोकतांत्रिक, संघीय और धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण को आगे बढ़ाएगा।

इस बीच मोदी शासन ने मजदूर-विरोधी चार लेबर कोड लागू किए, 2005 के ऐतिहासिक मनरेगा अधिनियम को समाप्त कर दिया, बिजली संशोधन विधेयक तथा स्मार्ट मीटरों के माध्यम से बिजली के निजीकरण को तेज़ किया और एक खतरनाक बीज विधेयक पेश किया। नवीनतम हमला एफसीआई के साइलो पर अदानी और लीप इंडिया की दो-ध्रुवीय पकड़ है, जिसके तहत देश के 77.5 प्रतिशत खाद्यान्न पर उनका नियंत्रण स्थापित होगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले मुफ्त अनाज में भी कटौती की जा रही है। जबकि किसानों का एक भी रुपया कर्ज़ माफ नहीं किया गया, वहीं कॉरपोरेट घरानों के 16 लाख करोड़ रुपये के बकाये को माफ कर दिया गया।

16 जनवरी 2026 को एसकेएम के आह्वान पर देशभर के किसानों ने गांव-गांव में शपथ ली कि 9 दिसम्बर 2021 के लिखित आश्वासनों की सभी मांगें पूरी होने तक लगातार व्यापक संघर्ष चलाया जाएगा। 12 फरवरी 2026 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा आहूत और एसकेएम द्वारा समर्थित सफल आम हड़ताल मजदूरों और किसानों का इन जनविरोधी नीतिगत हमलों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संयुक्त प्रतिरोध थी। 9 मार्च को जंतर-मंतर पर मजदूर-किसान संसद आयोजित की गई। 1 अप्रैल को केंद्र सरकार द्वारा चार लेबर कोड लागू किए जाने के विरोध में पूरे देश में “काला दिवस” मनाया गया। इन्हीं सभी घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में एसकेएम का अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

सम्मेलन ने निम्नलिखित 7 प्रमुख मांगें पारित कीं:

  1. भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता नहीं चलेगा। सभी मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को रद्द किया जाए।
  2. सभी फसलों की गारंटीकृत खरीद के साथ C2+50% की दर से एमएसपी का कानून बनाया जाए।
  3. ग्रामीण कर्ज़दारी और किसान तथा दिहाड़ी मजदूर की आत्महत्याओं को समाप्त करने के लिए व्यापक कर्ज़ माफी लागू की जाए। प्रत्येक किसान आत्महत्या पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए।
  4. चारों लेबर कोड रद्द किए जाएं तथा सभी मजदूरों को ₹31,000 न्यूनतम मासिक वेतन दिया जाए।
  5. मनरेगा को पुनः बहाल किया जाए, 200 दिनों के रोजगार तथा 700 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी सुनिश्चित की जाए।
  6. बिजली निजीकरण विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) संशोधन विधेयक वापस लिए जाएं।
  7. जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं चलेगा, कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग नहीं चलेगी। एलएआरआर अधिनियम 2013 के तहत भूमि अधिकारों की रक्षा, वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत आदिवासियों एवं गैर-आदिवासी वनवासियों के अधिकारों की रक्षा तथा पेसा अधिनियम 1996 के तहत स्वशासन एवं आदिवासी स्वराज लागू की जाए।
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