इस बात पर आपको जरूर आश्चर्य होगा लेकिन यह सच है कि 15 अगस्त 1947 के दिन जब पूरा भारत आजादी का जश्न मना रहा था, उस दिन टिहरी गढ़वाल में आजादी के सेनानियों की गिरफ्तारियां हो रही थी। टिहरी तब भी एक रियासत थी, जिस पर पंवार वंश का शासन था। राजशाही ने आजादी को अस्वीकार कर दिया था लेकिन प्रजामंडल का आंदोलन जारी रहा, जनवरी 1948 तक।
15 अगस्त 1947 की प्रातः प्रजामंडल के नेता परिपूर्णानंद पैन्यूली ऋषिकेश से टेहरी की ओर चल दिए लेकिन उन्हें नरेंद्रनगर में गिरफ्तार कर टिहरी जेल भेज दिया गया। कुछ सत्याग्रह ही पहले से ही जेल में बंद थे। इसके खिलाफ 16 अगस्त को टिहरी में आम हड़ताल हो गई। बाजार बंद। आजाद भारत और गुलाम रियासत की पहली आम हड़ताल।
जो विवरण मिलता है, उनमें शंकरदत्त डोभाल प्रेमलाल वैद्य, रामचंद्र उनियाल, बुद्धि सागर नौटियाल, नागेंद्र उनियाल, जीत सिंह जरधारी, चतर सिंह नकोटी, विद्यासागर नौटियाल आदि 16 अगस्त को गिरफ्तार हुए। खैर, बाद में रिहा भी हुए और टिहरी भी जनवरी 1948 में आजाद हो गई। लंबा इतिहास है समय-समय पर अवगत कराते रहेंगे।
फोटो – टिहरी की आजादी के प्रमुख सेनानी, प्रजामंडल के नेता। फोटो में बुद्धिसागर नौटियाल, रामचंद्र उनियाल, श्रीलाल थपलियाल, त्रेपन सिंह नेगी, दादा दौलतराम, पुरुषोत्तम दत्त रतूड़ी, सरदार गुरदयाल सिंह व सुंदरलाल बहुगुणा आदि जी को पहचाना जा सकता है। साथ ही शहीद श्रीदेव सुमन और शहीद नागेंद्र सकलानी। श्रीदेव सुमन 1944 में पहले ही शहीद हो चुके थे और नागेंद्र सकलानी जनवरी 1948 में शहीद हुए। एक और शहीद मोलाराम भरदारी की फोटो उपलब्ध नहीं है।





