बागेश्वर, चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संगठन के बैनर तले आज नगर के एक होटल में विभिन्न संगठनों से जुड़े जागरूक लोगों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बागेश्वर में धरना-प्रदर्शन के लिए प्रशासन की ओर से निर्धारित किए जा रहे आंदोलन स्थल को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सभी ने एक स्वर में कहा कि आंदोलन स्थल का निर्धारण प्रशासन की ओर से जबरन नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों से सुझाव लेकर ऐसा स्थान तय किया जाए, जहां लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई जा सके।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि धरना-प्रदर्शन और आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में आंदोलन स्थल ऐसा होना चाहिए, जहां आम जनता और आंदोलनकारियों की पहुंच आसानी से हो और उनकी आवाज संबंधित अधिकारियों एवं आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। प्रशासन द्वारा बिना स्थानीय लोगों की राय लिए आंदोलन स्थल तय किया जाना उचित नहीं है।
वक्ताओं ने कहा कि बागेश्वर में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े संगठन समय-समय पर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। ऐसे में आंदोलन स्थल के संबंध में निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आंदोलन स्थल का चयन किया जाए।
बैठक में मौजूद लोगों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने स्थानीय लोगों की राय और सुझावों को दरकिनार कर जबरन आंदोलन स्थल थोपा तो इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि प्रशासन को इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सभी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करनी चाहिए और सर्वसम्मति से आंदोलन स्थल का निर्धारण किया जाना चाहिए।
बैठक में कहा गया कि आंदोलन स्थल केवल धरना देने की जगह नहीं है, बल्कि यह जनता की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम भी है। इसलिए इसके चयन में पारदर्शिता और जनभागीदारी जरूरी है। संगठनों ने प्रशासन से जल्द बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर समाधान निकालने की मांग की।
बागेश्वर जनपद हेतु बागेश्वर के थानेदार बागेश्वर के
तहसीलदार बागेश्वर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी द्वारा चयनित किए गए धरना स्थल को सिरे से खारिज करते हुए नारा दिया गया कि “जहां जिलाधिकारी वहां धरना”।
बैठक ने आश्चर्य व्यक्त किया कि आंदोलन की अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले बागेश्वर जनपद के लिए जिस स्थल को धरने प्रदर्शन हेतु चयनित किया गया है वह स्थल संकरी सड़क के साथ लगा हुआ ऐसा स्थान है जहां 10 या 12 लोग भी नहीं बैठ सकते हैं, बैठक ने इस स्थल को चयनित किये जाने को चयनकर्ताओं के दिमागी दिवालियापन की संज्ञा दी गई।
बैठक में तय किया गया है कि इस काले नियम को खारिज करवाने के लिए हर संभव आंदोलन किए जाएंगे।
विरोध के क्रम में जनता की प्रतिनिधि सभाओं में इस काले नियम का विरोध सभाओं के प्रस्तावों और प्रतिनिधित्व द्वारा धरना प्रदर्शन किए जाने की शक्ल में करवाते हुए इस नियम को तोड़ने वाले कार्यक्रम तब तक चलाए जाते रहेंगे जब तक यह नियम सरकार वापस लेने की घोषणा नहीं करती है।
इस दौरान रमेश पांडे कृषक, कवि जोशी, भुवन कांडपाल, हरीश ऐठानी, गोविन्द सिंह भंडारी, हीरा बल्लभ भट्ट, चरण सिंह बघरी, वरुण चंदोला, अर्जुन भट्ट, नरेंद्र खेतवाल, अंकुर उपाध्याय, रमेश पाण्डेय, गोपा धपोला, सरोज आर्या आदि मौजूद रहे।






