आई टी सेल के तनखैय्या, संघी बंधुगण कई दिन से रूदन- क्रंदन, चीत्कार- हाहाकार मचाए हुए थे कि नेहा झारखंड क्यों नहीं जा रही हैं, सिर्फ नॉन-बायोलॉजिकल 56 इंची महाप्रभु के खिलाफ ही क्यों वे जंतर-मंतर पर क्यों आंदोलन करती रही !
यह अलग बात है कि नेहा जिस संगठन आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, वो तो रांची में छात्र- युवाओं के मोर्चे पर डटा ही हुआ था.
बहरहाल आज जब नेहा रांची पहुंची तो आई टी सेल के तनखैय्या, संघी बंधुगण फिर दुखी हो गए कि ये रांची क्यों आ गयी ? पहले वे दुखी थे कि नेहा रांची क्यों नहीं आ रही और आज दुखी थे कि रांची क्यों आ गयी ! इनके दुखों- पीड़ाओं का कोई वारापार नहीं ! ये इतने दुखी, इतने पीड़ित हैं कि, 12 साल देश के सबसे बड़े पद पर रहने के बाद भी नॉन-बायोलॉजिकल 56 इंची महाप्रभु गाहे- बगाहे अपने आप को सबसे बड़े पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करते रहते हैं !
नेहा के रांची पहुंचने पर जो मार्मांतक पीड़ा इनके कलेजे में उठी, उससे ठंडक पाने के लिए भाई लोगों ने स्याही अपने हाथों पर उड़ेल ली ! इतने से भी कलेजे को ठंडक न पहुंची तो हाथों पर उड़ेली स्याही नेहा पर उछाल डाली !
पर जो शिक्षा की बेहतरी और सुधार के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें स्याही से क्यों चोट पहुंचती ? जो रौशनाई को समाज में रौशनी लाने के औजार की तरह देखते हैं, वे भला रौशनाई से क्यों कर घबराने लगे !
नेहा भी नहीं घबराई, चेहरे पर बिखरी स्याही को आराम से पानी से धोया और फिर धुआंधार हुकूमत को ललकार वाला भाषण दिया.
जिसने नेहा पर स्याही फेंकी वो बाद में पकड़े जाने पर जय श्रीराम का नारा लगा रहा था. पता नहीं नारा लगा रहा था या घबराहट दूर करने के लिए राम नाम जप रहा था ! महाकाव्यों में, कथाओं में तो पढ़ते आए थे कि राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं. पर ये उत्पात- उन्माद फैलाने के लिए राम का नाम इस्तेमाल करने वाले तो लगता है ना कोई मर्यादा जानते हैं और ना मानते हैं ! किसी मर्यादा से इनका लेना-देना होता तो अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी जैसे मर्यादाहीन कदम पर इनका खून जरूर खौलता !
लाठी- गोली- आंसू गैस, पैलेट गन के बाद स्याही, इस मुल्क की महाशक्तिशाली हुकूमत और उसकी गालीबाज, लफंगों के गिरोह के,लगता है, कदम कुछ ज्यादा ही थरथरा रहे हैं , डर के मारे गला ज्यादा ही खुश्क हो चला है ! शाबास जेन जी कॉमरेड डटे रहो, लड़े चलो !






