लोग भूल गए इन दोनों के नाम इसलिए याद दिला दूँ। दिल्ली में CAA के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट करने वालों पर कट्टा लहरा कर खुले आम गोली चलाने वाला व्यक्ति रामभक्त गोपाल था और कपिल गुर्जर वो शख्स है जिसने दिल्ली में शाहीनबाग के बाहर फायरिंग की थी।
स्वतंत्र भारद्वाज इसकी तीसरी पीढ़ी है और इसका सॉफ्टवेयर अपडेट है।
दरअसल इन तीनों ही युवाओं ने एक ही काम किया। जो भी दिल्ली में संसद भवन से कुछ किलोमीटर दूर तक प्रदर्शन करने पहुँचे उन्हें डराया-धमकाया। इसलिए इन तीनों को आप एक साथ जोड़कर देख सकते हैं क्योंकि ये सभी किसी न किसी प्रकार से शांतिपूर्ण आंदोलनों को कुचलने में आततायी सरकार के सहयोगी बने हुए थे।
लेकिन रामभक्त गोपाल और कपिल गुर्जर का मॉडल 2026 में आउट ऑफ डेट हो गया, इसलिए थर्ड जेनरेशन को लॉन्च करके नाम दिया गया—’स्वतंत्र भारद्वाज’।
इसका सॉफ्टवेयर अपडेट और थर्ड जेनरेशन वाला है।
आप पूछेंगे कि वह कैसे? तो देखिए पिछले दोनों मॉडल थोड़े ओल्ड थे। वे दिल्ली पुलिस के साथ अपने सम्बंध खुलकर स्वीकार नहीं कर पा रहे थे लेकिन स्वतंत्र भारद्वाज के प्रोसेसर और रैम दोनों दिल्ली पुलिस द्वारा बनाए गए हैं।
एक पॉडकास्ट में जब उससे पूछा गया कि CJP प्रोटेस्ट में आपके हाथ में जो डंडा था वह कहाँ से लेकर आए थे? तो स्वतंत्र कैमरे पर अपना जूता दिखाते हुए बोला कि ‘ये जो जूता आप देख रही हैं, यह दिल्ली पुलिस का जूता है।’ हत्प्रभ रह गई एंकर बोली कि ‘यह क्या बात कर रहे हो!’
तब स्वतंत्र ने और खुलासा किया, “हाँ, हम बिना फार्म भरे दिल्ली पुलिस बनकर चलते हैं, हमारे पास सब है।”
आगे और हेकड़ी दिखाते हुए उसने बताया कि सीजेपी आंदोलन में निशु यादव के पिता का सर फाड़ने में IPC की धारा 307 के तहत हत्या की कोशिश का केस बनता था लेकिन उसे जेल नहीं भेजा गया। वह पूरी रात बेखौफ घूमता रहा था।
उसने बताया कि दिल्ली बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा के एक फोन कॉल के बाद उसे राहत मिल गई। उसने आगे दावा किया कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी भी उसके बड़े भाई हैं और उसे सभी का समर्थन हासिल है।
यानी कि सब कुछ खुलेआम सीना ठोक कर बता दिया कि उखाड़ लो क्या उखाड़ सकते हो? यानी कि हमारा सिक्योरिटी पैच भी अपडेट है।
ऐसा दुस्साहस तो कपिल गुर्जर और रामभक्त गोपाल कभी नहीं कर पाए। इसीलिए कहा है कि यह बिल्कुल नया मॉडल है, थर्ड जेनरेशन का।
यह रामभक्त गोपाल अल्ट्रा प्रो है।
इतिहास में भारत के अलावा सिर्फ एक ऐसा देश था, जहाँ इसी तरह के गुंडे को सत्ता का ऐसा संरक्षण हासिल था। हम बात कर रहे हैं आज से करीब सौ साल पहले के जर्मनी की। जहाँ हिटलर ने अपने राजनीतिक विरोधियों को हिंसा और डर के जरिए दबाने के लिए एक ऐसा ही संगठन बनाया था जिसका नाम था—स्टॉर्मट्रूपर्स (SA)। यह हिटलर का शुरुआती पैरामिलिट्री विंग था जिसे आम भाषा में ‘ब्राउनशर्ट्स’ कहा जाता था। इनका मुख्य काम था विपक्षी नेताओं को डराना, रैलियों में हिंसा फैलाना और सत्ता के दम पर आतंक का माहौल बनाना, भारत आज ऐसे ही गिरोहों की चपेट में है।
(श्याम सिंह रावत की वाल से)






