आप लोकसभा की राजनीति में हैं, आप विधानसभा की राजनीति में हैं या फिर पंचायत की राजनीति में हैं, आपको भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में एक भगत सिंह कोश्यारी जी के क्षेत्र वाले दानपुर से वोट मांगने का सौभाग्य अगर प्राप्त हुआ हो तो विकास की राजनीति के उस झूला पुल पर टांक दी गई ट्राली के साथ सेल्फी लेने का सौभाग्य आपने भी बटोरा ही होगा जो झूला पुल 10 साल पहले बरसाती आपदा में बह गया था।
10 साल पहले पिथौरागढ़ जनपद के नाचनी तथा बागेश्वर जनपद के भकुना गांव के बीच बना झूला फूल बर्षाती आपदा में बह गया था। बजट और देखरेख के आधार पर यह पुल पिथौरागढ़ जनपद के हिस्से का पुल था जो एक दौर में बिचला दानपुर की महरगाड़ घाटी की लाइफ लाइन माना जाता था। भीषण बाढ़ की वजह से जब यह पुल बह गया तब क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पिथौरागढ़ जनपद प्रशासन ने झूला के बचे रह गए खम्भों के बीच एक ट्राली टांक दी थी। इस ट्राली को रस्सी के सहारे इस छोर से उस छोर तथा उस छोर से इस छोर तक खींच कर सामान तथा मनुष्य को ढोया जाता है।
इन 10 सालों में यह पुल फोटो सेशन का माध्यम तो बना लेकिन इस झूले के स्थान पर पुल के नवनिर्माण का कोई प्रयास केंद्र या राज्य की सरकार ने नहीं किया है। इस बीच वह झूला पुल की ट्राली अचानक से जन चर्चा में इसलिए आ गई क्योंकि इस पुल के निर्माण की सबसे पहली जिम्मेदारी जिस विधायक सुरेश गढ़िया की बनती थी वह विधायक स्वयं इस झूले पर फोटो सेशन करने पहुंचे गये
क्षेत्रीय लोग बताते हैं कि 5 वर्ष पूर्व जब प्रदेश में विधानसभा के चुनाव लगे हुए थे तब प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री इस क्षेत्र में चुनावी भाषण देने पहुंचे थे । अपने चुनावी भाषण में उन्होंने जनता से कहा था कि यह बहुत कठिन और बड़ा काम नहीं है आप हमें जिताइए और सरकार बनते ही हम इस पुल का निर्माण करवा देंगे।
इस पुल को लेकर एक हास्यास्पद स्थिति यह बनती है कि यह पुल पिथौरागढ़ जनपद के प्रशासन के हिस्से का है और हमारे विद्वान जनप्रिय नेता बागेश्वर जनपद से इस पुल के निर्माण की मांग करते हैं।
इस पुल की एक विशेषता यह भी है कि इस पुल की सबसे अधिक जरूरत नामती चेटाबगढ़ गांव के लोगों को होती है। नामती चेटाबगढ़ के रहने वाले श्री भगत सिंह कोश्यारी जिनकी भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस में राष्ट्रीय स्तर वाले कार्यकर्ता की पकड़ धकड़ है ने कभी भी सरकार से यह नहीं कहा कि समस्या बहुत बड़ी हो गई है इस लिए सरकार बाड़ में बह गए इस झूला पुल को नये सिरे से बनवा दे।
10 वर्ष पूर्व बरसाती आपदा की चपेट में आ गए इस पुल को लेकर आज सवाल संगठन ने बागेश्वर में गंभीर विमर्श किया। विमर्श के बाद संगठन ने तय किया कि आने वाले एक-दो दिन में नीति आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय से संवाद बनाते हुए दोनों महकमों से कहा जाएगा कि बागेश्वर जनपद और पिथौरागढ़ जनपद की सीमा से लगे भकुना , केचुवा, काभड़ी, कालापैर, बेतुवा बगड़ तथा मौनधुरा गांव जिन्हें रामगंगा नदी का तेज बहाव हमेशा आतंकित किये रहता है को अभी तक मोटर मार्ग से नहीं जोड़ा जा सका है की चिंता राज्य और केंद्र दोनों सरकारें करें। इन गांवों को रामगंगा नदी के आतंक से बचाव को ध्यान में रखते हुए मोटर मार्ग से जोड़ने का आदेश बागेश्वर प्रशासन को दिया जाए तथा भकुना और नाचनी को जोड़ने वाला झूला पुल जो 10 वर्ष पूर्व बरसाती आपदा में बह गया था जिसे भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस द्वारा सेल्फी प्वाइंट के रूप में स्थापित कर दिया गए है के निर्माण का आदेश सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के जिला प्रशासन को दिया जाए।






