कल उत्तराखंड के दो विधायकों को दो अलग-अलग विवादास्पद मामलों में अपने पक्ष प्रस्तुत करते हुए देखा. दोनों ही विधायक सत्ताधारी भाजपा के हैं- सल्ट के महेश जीना और कपकोट के सुरेश गड़िया.
दोनों ही विधायकों का कहना था कि पुलिस उनकी नहीं सुनती. सुरेश गड़िया ने तो निवर्तमान डीजीपी को तक शिकायत देने के बावजूद कार्यवाही न होने का आरोप लगाया. वे कह रहे हैं कि कोतवाल और पुलिस अधीक्षक को तो कई बार शिकायत देने के बाद भी कुछ नहीं हुआ.
सवाल ये है कि अगर सत्ता पक्ष वालों की भी पुलिस नहीं सुन रही है तो सुन किसकी रही है ? किसकी मित्र पुलिस है ये ?
अगर कोतवाल या थानेदार के आगे सत्ता पक्ष का विधायक लाचार है तो फिर दो ही बात हो सकती है कि या तो विधायक बहुत ही गलत है और पुलिस चाह कर भी उनके साथ नहीं खड़ी हो पा रही है या फिर पुलिस कतई बेलगाम हो चली है और विधायक को कुछ नहीं समझती !
दोनों में से कौन सी बात सही है धामी जी ? जो भी बात सही हो पर दोनों में से किसी भी एक बात का सही होना, आपके “पांच साल बेमिसाल’ पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाता है ! इन्द्रेश मैखुरी





