- 1946 में अंतरिम सरकार के बनने के पहले नेहरू ने अपनी 98 प्रतिशत सम्पत्ति देश के नाम दान कर दी थी। उनकी मौत के बाद उनके पास उनकी लिखी कुछ किताबें,मामूली कपड़े और थोड़े पैसे के अलावा और कुछ नहीं था।
- नेहरू जिन दिनों प्रधानमंत्री थे अपनी जेब मे 200 रुपये लेकर चलते थे। जब वो शाम को वापस आते उनके पास कुछ नही बचता था क्योंकि ज्यादातर पैसे वो पाकिस्तान से शरणार्थी बनकर आये लोगों पर खर्च कर देते थे।
- नेहरू जी की बहन विजयलक्ष्मी पण्डित एक बार शिमला गयी तब शिमला पंजाब का हिस्सा था। वो जिस सर्किट हाउस में थी वहां उनके रुकने का बिल 2500 रुपये हुए थे। होटल वालों ने पंजाब के सीएम को ये बात बताई तो पंजाब के सीएम को नेहरू को बताने में बहुत संकोच हुआ। उन्होंने जब नेहरू से कहा कि इसे किस मद में डाले सर तो नेहरू ने कहा इसका भुगतान वो अपनी सैलरी से करेंगे लेकिन उनके पास अभी इतने पैसे नहीं है इसलिए 5 किश्तों में वो पैसा देंगे।
- नेहरू के शयनकक्ष में एसी नही था वो छत वाले पंखे के नीचे सोते थे और एयर कंडीशनर केवल एक था जो बैठक में मेहमानों के लिए लगा था।
- अरब के सुल्तान ने नेहरू को एक बहुत महंगी कार गिफ्ट दी थी लेकिन उसे उन्होंने इस्तेमाल न करके राष्ट्रपति के काफिले में शामिल करवा दिया वो कार अभी भी वहां मौजूद है।
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ये सब महज कुछ उदाहरण है।
ये उस नेहरू की बात है जो इलाहाबाद के बड़े रईस मोतीलाल नेहरू के बेटे थे जो कैम्ब्रिज में पढ़े । इलाहाबाद में सबसे पहली विदेशी कार नेहरू को उनके पिता ने गिफ्ट की थी।
उसने देश की आजादी की पुकार सुनी और विलासिता का जीवन छोड़कर खादी पहनी और आजीवन पहनता रहा, जिसने जीवन के 9 साल जेल में काटे। जिसकी विद्वता का लोहा दुनिया मानती है।
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आपको याद होगा 2023 में नीच सरकार ने राहुल गांधी से उनका बंगला खाली करवाने की बात की।
आपने इलाहाबाद का आनंद भवन जो स्वराज भवन था उस शानदार इमारत को देखा है। वो इमारत नेहरू के बाप की थी यानि आज उस पर राहुल गांधी का पुश्तैनी हक होता अगर इंदिरा जी ने उसे देश के नाम दान न कर दिया होता।
जो पार्टी 60 साल सत्ता में रही उसके नेताओं की संपत्ति उसके कार्यालय उसका पहनावा देख लो और खुद को फकीर कहने वालों की विलासिता देख लो ।
उन लोगों ने अपनी निजी संपत्ति तक देश के नाम कर दिया जिससे आज सरकार पैसे कमा रही है ये बात राम मंदिर से चन्दा तक चुरा लेने वाले कभी नहीं समझेंगे लेकिन आप लोग कब तक गुमराह रहोगे।
Post research = Abhishek Singh
नेहरू को समझने की ईमानदार कोशिश -(रमेश कृषक)
नेहरू के बाद भारत को समझने की ईमानदार कोशिश का नाम है राहुल गांधी,
राजनीति में समझ का विकास चाहता है राहुल कि
सत्ता लोगों के लिए हो और लोग देश के लिए हों,
ऐसा ही तो नेहरू भी चाहते थे ।
पिता के चिथड़े और दादी की छलनी लाश पाठशाला रही है
राहुल की,
तभी तो वह बड़े आराम से
जेबों में हाथ डालकर
निकल पड़ता है किसी भी ओर ,
और बैठ जाता है कहीं भी
किसी के भी साथ।
वह राहुल है ,
राहुल जिसका अर्थ होता है कांटा ,
वह चुभता है आंखों में उनकीजो नहीं देखना चाहते समाज में समानता, सद्भावना और धर्म में निरपेक्षता ,
वह ऐसा ही है
क्योंकि वह नेहरू की तरह भारत को देखने लगा है, जानने लगा है
समझने लगा है ।
नेहरू की खींची गई लकीर को मिटा नहीं पा रहे हैं जो
वे डरे हुए हैं
यह जानकर कि राहुल देश को
नेहरू की तरह देखने समझने जानने लगा है
और बने रहने देना चाहता है भारत को नेहरू का देश।





