आगे बढ़ने से पहले बता दूँ कि नेहा नाम का अर्थ प्यार , स्नेह , ओस की बूंद होता है , नेहा नाम की लड़कियों ने हमेशा देश के लिये कुछ ना कुछ योगदान दिया है ,
1 – पहली नेहा बोरा : JNU की छात्रा नेहा बोरा जिसने हमेशा जुल्म के खिलाफ़ मज़बूती से आवाज उठाई फिर वो बिलकिस बानो वाला मुद्दा हो , UGC वाला मुद्दा हो , CAA NRC वाला मुद्दा हो NEET पेपर लीक वाला मुद्दा हो , नेहा बोरा ने हमेशा निडर होकर समाज की भलाई और इंसाफ के लिये काम किया , जंतर मंतर 23 दिन की भूख हड़ताल पर बैठकर उन्होंने देश के युवाओ और छात्रों को इंसाफ दिलाने का काम किया ,
नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं। बचपन का कुछ समय उनका पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में बीता। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने थिएटर और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। नेहा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से B.A. किया इसके बाद डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी से M.A. की डिग्री हासिल की। वर्तमान में नेहा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स से Ph.D कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वो लंबे वक्त से छात्र आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों पर एक्टिव भी हैं।
नेहा बोरा फिलहाल ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष हैं। याद रहे कि JNU की छात्र राजनीति में AISA लंबे समय से सक्रिय संगठन रहा है। नेहा अपने साथियों के साथ भी कई बार हंसते, मस्ती करते तस्वीरों में दिखाई देती हैं। वो एक Gen Z स्टूडेंट लीडर हैं तो ये बात सामान्य है कि उनका तरीका और अंदाज भी अलग है। उनका ये अंदाज सबके दिलों में गहरी छाप छोड़ता है। प्रोटेस्ट खत्म होने के बाद वो एक वीडियो में दोस्तों के साथ डांस करती नजर भी आ रही हैं।
जंतर-मंतर आंदोलन से पहले भी नेहा बोरा कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलती रही हैं। शिक्षा के निजीकरण, पेपर लीक, मॉब लिंचिंग, बिलकिस बानो मामले में न्याय और गाजा के मानवीय संकट जैसे विषयों पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी हैं। नेहा की सक्रियता केवल यूनिवर्सिटी कैंपस तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई और आंदोलनों में भी उनकी भागीदारी देखने को मिलीं।
जब जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP इस आंदोलन की कहानी लिखी जाएगी तो नेहा बोरा का नाम उसमें प्रमुखता से दर्ज होगा। ये बात लिखने में कोई दो राय नहीं कि नेहा बोरा संघर्ष, धैर्य और अपनी बात पर अडिग रहने की कहानी हैं। चाहे कोई उनके विचारों से सहमत हो या असहमत, जंतर-मंतर आंदोलन में उनकी भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक चर्चित छात्र नेता के रूप में स्थापित कर दिया है।






