तो भाईयो और बहनों , सुबह से सरकार बहादुर और उनके थाली, चम्मच, कोटेरे, गिलासों के गले खुश्क हो गए, जुबान हलकान हो गयी, ये बता-बता कर कि अरे प्रेमनगर में पुल नहीं पुल की अप्रोच रोड में गड्ढा हुआ है ! भले ही 16 करोड़ से बने इस पुल में जाने के लिए जहां से गुजरना था, वहां गड्ढा होने के कारण पुल में नहीं पहुंचा जा सकता है पर फिर भी ऐसा थोड़ा कहना चाहिए कि पुल में गड्ढा हो गया !
जिनकी सारी राजनीति ही अफवाहबाजी पर टिकी है, वे जब तथ्यों के सही रूप में प्रस्तुत किये जाने पर जोर देने लगें और सही रूप से तथ्य न प्रस्तुत करने की शिकायत करते हुए नाराज होने लगें तो लगने लगता है कि मनुष्यता का कुछ अंश तो इनमें अभी भी शेष है ही !
मुख्यमंत्री स्मित मुस्कान के साथ बता रहे हैं पुल में नहीं उससे पहले हुआ है गड्ढा ! गड्ढा जहां भी हुआ मुख्यमंत्री जी, हुआ तो आपके विकास के विज्ञापन पर ही है ! जो कुछ दिन पहले आप करोड़ों के विज्ञापन खर्च करके बता रहे थे- पांच साल बेमिसाल, उन पांच सालों का एक बेमिसाल नमूना है यह गड्ढा !
भाई लोग अपनी विफलता और नकारेपन का भी विज्ञापन करने से नहीं चूकते ! कह रहे हैं- पुल से पहले गड्ढा होने पर सरकार सख्त, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट ! ओहो तो रिपोर्ट मांगना भी सख्त कार्यवाही है, इस सरकार में ! पिछली सरकारों में रिपोर्ट मांगी जाती तो यह औपचारिकता भर होती पर एनएच 74 घोटाले में मुअत्तल हो चुकने बाद भी धाकड़- धुरंधर- हैंडसम के आंखों के तारे अफसर ने यह रिपोर्ट तलब की है तो इसे सख्त कार्यवाही का दर्जा हासिल हो गया है !
रिपोर्ट बनाने वाला अगर लिख दे कि- हुजूर नीचे से ऊपर तक जितनी सेवा-पानी करनी पड़ती है, उसमें जो बन गया, जो बच गया, वो क्या काफी नहीं है – तो क्या होगा ? लेकिन ऐसा कौन लिखेगा, कोई नहीं ! ठीकरा तो बारिश के सिर फूटेगा और इस तरह से यह सख्त कार्यवाही अपनी गति को प्राप्त हो जाएगी !
शाम होते सरकार समर्थक किलक रहे हैं- देखो, देखो, सरकार ने गड्ढा भर दिया, सरकार ने गड्ढा भर दिया ! गड्ढा भरना भी उनके लिए विज्ञापनी उपलब्धि है ! ” सबसे कम समय में सड़क का गड्ढा भरने वाले पहले मुख्यमंत्री बने धाकड़- धुरंधर- हैंडसम “- अगर कल कहीं सड़कों पर ऐसे होर्डिंग लगे दिखें तो चौंकिएगा मत, वे ऐसा कर ही सकता हैं, इस मामले में तो चरम ढीठता हासिल कर चुके हैं, वे ! समाज में गड्ढे खोदना, खाई खोदना और फिर उन्हें झूठ, फरेब और नफरत से भरना, यही तो कुल जमा उपलब्धि है, उनके राज की !






