कुंवर प्रसून को उनकी पुण्यतिथि (15 जुलाई ) पर याद करते हुये विनम्र श्रद्धांजलि -(चारु तिवारी)

हिमालयी सरोकारों के लिये प्रतिबद्ध पत्रकार, चिन्तक और आंदोलनकारी कुंवर प्रसून को उनकी पुण्यतिथि (15 जुलाई ) पर याद करते हुये विनम्र श्रद्धांजलि। हमने ‘क्रिएटिव उत्तराखंड-म्यर पहाड़’ की ओर से उनका पोस्टर जारी किया था।

¤ टिहरी गढ़वाल की हेंवलघाटी के कुड़ी गांव में 8 मर्इ 1950 को जन्मे गांधीवादी सर्वोदयी कार्यकर्ता, साहसी, सत्यनिष्ठ, बेबाक, रचनाधर्मी और मानवीय संवेदनाओं से लबालब भरे कलम के धनी पत्रकार।
¤ कुंवर प्रसून जीवन भर तरह-तरह के सार्थक आंदोलनों से जुड़े रहे, चाहे वह चिपको आंदोलन हो, शराबबन्दी आंदोलन हो, या शिक्षा के समान अवसरों का आंदोलन हो, बीज बचाओ आंदोलन, टिहरी बांध विरोधी आंदोलन, खनन आंदोलन या फिर कोर्इ और सामाजिक आंदोलन क्यों ना हो, आन्दोलन करते-करते कुंवर प्रसून का जीवन ही आंदोलनकारी सरोकारों का जीवंत दस्तावेज बन गया था।
¤ कुंवर प्रसून का जन्म ‘भंडारी’ परिवार में हुआ पर उन्होंने अपने नाम के आगे से छात्र जीवन में ही जातिबोधक शब्द ‘भंडारी’ हटाकर खुद को ‘कुंवर प्रसून’ बना दिया।
¤ प्रसून जी का जीवन आखरी दिनों में परंपरागत बीजों और खेती को बचाने के लिये समर्पित रहा। उन्होंने हरित क्रांति के दौर में रासायनिक खादों, कीटनाशकों और जी. एम. फसलों का पुरजोर विरोध हर मुमकिन तरीके से किया।
¤ हरित क्रांति के दौर में कुंवर प्रसून द्वारा रचित ‘डंकल का मंडाण’ बहुत प्रसिद्ध हुआ।
¤ 25 मई 1974 की पहली असकोट-आराकोट यात्रा में सुन्दर लाल बहुगुणा जी के नेतृत्व में कुंवर प्रसून ने हिस्सा लिया। इसका मकसद महिला सशक्तीकरण, चिपको आंदोलन जागरूकता, पलायन पर चिंतन और अपने घर गांवों को जानना था।
¤ कुंवर प्रसून सदा गरीबों, अभावग्रस्तों, दलितों, कमजोरों, गरीबों और औरतों के हमदर्द रहकर उनके पक्ष में मजबूती से खड़े होते। कुंवर प्रसून छात्र जीवन में ही देश में लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा गठित ‘युवा छात्र संघर्ष वाहनी’ जैसे महत्वपूर्ण संगठन में उत्तर प्रदेश के संयोजक रहे।
¤ कुंवर प्रसून ने देश के प्रमुख समाचार पत्र-पत्रिकाओं नवभारत टाइम्स, युगवाणी, दिनमान, अमर उजाला, दैनिक जागरण, रविवार, धर्मयुग सहित कई पत्र-पत्रिकाओं में कालजयी लेख लिखे। खासतौर पर दलितों पर लिखे उनके लेख उनको इतिहास में अलग कतार में खड़ा करते हैं। ‘आनंद बाजार पत्रिका’ में दलितों पर लिखे उनके लेख के लिये उन्हें ‘समता पुरस्कार’ से नवाजा गया।
¤ मात्र 56 साल की उम्र में 15 जुलाई 2006 निधन।-(चारु तिवारी)

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