जगमोहन को ‘कुवंर प्रसून स्मृति पर्यावरण एवं जनपक्षधर पत्रकारिता सम्मान’ मिलना प्रतिबद्ध पत्रकारिता का सम्मान है -(चारु तिवारी)

हम सब साथियों को कई बार उनसे ईर्ष्या होने लगती है कि वह इतना लिख कैसे लेते हैं। एक ऐसा शख्स जो जिंदगी भर लिखता रहा। अभी लिखने में रत है। स्वतंत्र रूप से, बेवाक होकर, मुद्दों के साथ जुड़कर, जमीनी सच्चाई को समझकर, शब्दों की संवेदनाओं, संघर्षों कें मूल्यों और चेतना के द्वार खोलते हुए उसने इतना लिखा जो अकल्पनीय है। इस आदमी के पास अपने को गढ़ने के लिए कितने बड़ा केनवास है, उस पर चलाने के लिए कितनी तूलिकाएं हैं, समाज के कितने रंग वह अपने लेखन में भर सकता है।

समाज के मर्म को समझते हुए उन्होंने राजनीति, भाषा, साहित्य, संगीत, कला, पर्यावरण, व्यक्तित्वों, समसामयिक सवालों आदि पर राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय पत्र-पत्रिकाओं में इतना लिखा कि उन्हें जगमोहन रौतेला के रूप में पहचान मिली। एक ऐसे पत्रकार के रूप में जो कभी सत्ता, संघर्ष और मुसीबतें में डिगा नहीं। मुझे बहुत गर्व होता है कि जगमोहन हमारे मित्र के साथ छोटे भाई जैसे हैं। उन्हें ‘कुंवर प्रसून’ की स्मृति में पहला ‘कुवंर प्रसून स्मृति पर्यावरण एवं जनपक्षधर पत्रकारिता सम्मान-2026’ प्रदान किया जा रहा है। इस सम्मान के लिए जगमोहन सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। उन्हें बधाई और संस्था का आभार कि उन्होंने एक सही और प्रतिबद्ध पत्रकार का चयन किया।

जगमोहन भाई और हमारा साथ लगभग तीन दशक का है। हम दोनों ने अपना सार्वजनिक जीवन और पत्रकारिता लगभग साथ-साथ शुरू की। हम उनसे दो-चार साल पहले सामाजिक जीवन में आये होंगे, लेकिन इसका ज्यादा मतलब नहीं है, क्योंकि नब्बे के दशक में हम सब लोग पत्रकारिता और जनआंदोलनों में एक साथ शामिल हो रहे थे। उन चीजों को समझने की कोशिश कर रहे थे, जिन्होंने बाद में हमें पहाड़ को देखने का नजरिया और उसे गहरे से अभिव्यक्त करने की समझ दी। जगमोहन की पत्रकारिता की शुरुआत एक एक्टिविस्ट के तौर पर हुई। उनके लेखन और व्यक्तित्व में वह कभी छूटा भी नहीं।

उन्होंने कभी रुई में लपेटकर पत्थर नहीं मारा, जो उन्हें जनपक्षीय लगा उसे बिना लाग-लपेट के लिखा-कहा। यह भी महत्वपूर्ण है कि जगमोहन कभी किसी बड़े मीडिया हाउस में नहीं रहे, लेकिन उन्होंने समाज को ही अपना मीडिया हाउस बना लिया। इसने उन्हें उन लोगों से भी बड़ी पहचान दी, जो रोज टीवी चैनलों या आज यू-ट्यूब में दिखाई देते हैं। उन्होंने बहुत प्रतिबद्धता, ईमानदारी और मूल्यों के साथ अपनी पत्रकारिता को गढ़ा। इस तरह की पत्रकारिता अब तो दुर्लभ ही है।

जगमोहन ने देश की लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लेख लिखे। उनका लेखन व्यापक रहा है। कोई विषय ऐसा नहीं है, जिसमें उन्होंने नहीं लिखा हो। राजनीति और सामाजिक विषयों पर तो उनका लेखन है ही, पर्यावरण के सवालों पर उन्होंने कई सारगर्भित लेख लिखे हैं। पिछले सालों में भू-कानून को लेकर जितनी भी बातें हो रही हैं, उसे जगमोहन ने 2003 में ही अपने कई लेखों के माध्यम से रखा। टिहरी बांध से लेकर पहाड़ में बन रही बड़ी बांध परियोजनाओं पर उनके लेख हैं। जल, जंगल और जमीन पर दर्जनों लेख हैं। राजनीति विशेषकर उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ को उनके लगातार छपने वाले लेखों और रिपोर्ट में देखा जा सकता है।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास और समय-समय पर चले आंदोलनों का एक तरह से वह ज्ञानकोश हैं। जगमेाहन ने उत्तराखंड की भाषा-बोलियों पर बहुत लेख लिखे। हमारी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए उनके लेख बहुत तर्कपूर्ण हैं। साहित्य पर उन्होंने बहुत लिखा। उन्होंने कई ऐसे साहित्यकारों के इंटरव्यू लिये हैं, जिनका बहुत बड़ा काम है, लेकिन उन्हें आम लोगों ने उतना जाना नहीं। उन्होंने सुप्रसिद्ध नाटककार-उपन्यासकार गोविंदबल्लभ पंत का न केवल साक्षात्कार लिया, बल्कि उनके साहित्य पर चर्चा भी की। साठ के दशक में आकाशवाणी की सुप्रसिद्ध गायिका बीना तिवारी जब लंबे अंतराल तक संगीत से अलग रही तो उनके हल्द्वानी आने के बाद जगमेाहन ही पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने बीना तिवारी की रचनात्मक यात्रा को नये सिरे से लोगों को बताया। अब बीना तिवारी लगातार साहित्यिक आयोजनों में शामिल रहती हैं।

खैर, जगमोहन के पत्रकारिता में योगदान पर कभी पूरा लिखूंगा, लेकिन अभी इस सम्मान के आलोक में यह कहना हैं कि अपने निजी जीवन में कई तरह की झंझावतों के बावजूद उनका लेखन और व्यक्तित्व हम सबको शक्ति देने वाला है। वह एक तरह से जनसरोकरी पत्रकारिता के प्रतिनिधि पत्रकार हैं। वह कुंवर प्रसून के साथ रहे भी और उन पर काम भी किया। जगमोहन उत्तराखंड के जनसरोकारों की प्रतिनिधि पत्रिका ‘युगवाणी’ की रीढ़ हैं। उन्हें ‘कुवंर प्रसून स्मृति पर्यावरण एवं जनपक्षधर पत्रकारिता सम्मान-2026’ मिलना जनसरोकारी और प्रतिबद्ध पत्रकारिता का सम्मान है। हमने ‘क्रिएटिव उत्तराखंड’ के माध्यम से कुंवर प्रसून को याद करते हुए उनका पोस्टर भी प्रकाशित किया था। जगमोहन भी एक तरह से ‘क्रिएटिव उत्तराखंड’ का हिस्सा हैं, इसलिए हम सबके लिए यह गौरव का क्षण है। हम सबकी तरफ से जगमोहन भाई को बहुत-बहुत बधाई। शुभकामनाएं।

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