बागेश्वर जनपद में कृषि-उद्यान योजनाओं और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर किसान मंच उत्तराखंड ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने जिलाधिकारी बागेश्वर को पॉलीहाउस योजना तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के Per Drop More Crop सूक्ष्म सिंचाई ड्रिप इरिगेशन घटक से संबंधित दो अलग-अलग विस्तृत ज्ञापन और उपलब्ध दस्तावेज सौंपते हुए दोनों मामलों की मजिस्ट्रियल अथवा स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है ।
प्रैस को सम्बोधित करते हुए कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि हमारे सामने तीन सवाल हैं-पॉलीहाउस में किसानों के नाम पर खर्च पैसा कहां गया ड्रिप इरिगेशन में केंद्र और राज्य का पैसा जमीन पर कितना पहुंचा और DMF में खनन प्रभावित जनता के हिस्से के धन का वास्तविक उपयोग कहां हुआ तीनों मामलों में जवाब भाषण से नहीं दस्तावेज और जमीन के मिलान से मिलेगा।
किसान मंच ने पॉलीहाउस योजना से संबंधित उपलब्ध विभागीय जांच का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2021-22 में 591 पॉलीहाउस के निर्माण में 300.73 लाख की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त न किए जाने जैसी गंभीर अनियमितता दर्ज होने का दावा है।
मंच ने कृषकों के आवेदन संबंधी अभिलेख उपलब्ध न होने कई मामलों में स्थलीय सत्यापन के बिना भुगतान किए जाने की आशंका पॉलीहाउस पर योजना निर्माण वर्ष एवं अनुदान संबंधी सूचना पट्ट न लगाए जाने तथा सीमित फर्मों के माध्यम से काम कराए जाने जैसे बिंदुओं की स्वतंत्र जांच की मांग की।
विशेष रूप से दुलाई/फेट पर 57.12 लाख के पृथक व्यय को लेकर किसान मंच ने सवाल उठाया कि यह राशि किस आधार किस स्वीकृति और किस गणना से खर्च की गई।
विभागीय जांच में उल्लिखित गरुड विकासखंड के एक गांव में अभिलेखों में 15 पॉलीहाउस दर्शाए जाने के मुकाबले मौके पर 13 मिलने की बात का उल्लेख करते हुए किसान मंच ने कहा कि अब नमूना जांच पर्याप्त नहीं है। संबंधित अवधि में स्थापित प्रत्येक पॉलीहाउस का लाभार्थीवार भौतिक सत्यापन होना चाहिए। अगर 591 पॉलीहाउस बने हैं तो 591 जमीन पर मिलने चाहिए। जिस किसान के नाम पर भुगतान हुआ उस किसान के खेत तक जांच टीम पहुंचे। फाइल में संख्या और जमीन की संख्या अलग निकलती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
ज्ञापन में किसान मंच ने PMKSY के Per Drop More Crop के एमआई/ड्रिप इरिगेशन घटक में वित्तीय वर्ष 2019.20 से 2025.26 तक कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा किए गए कार्यों भुगतान लाभार्थी चयन और फर्मों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
मंच का कहना है कि उपलब्ध तृतीय पक्ष मूल्यांकन में कई स्थानों पर ड्रिप सिस्टम अनुपयोगी होने कुछ स्थानों पर केवल पाइप के अवशेष मिलने तथा कुछ मामलों में सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद प्रणाली विधिवत स्थापित न होने जैसी स्थितियाँ का उल्लेख सामने आया है।
इसके अतिरिक्त किसान मंच ने 17 मई 2021 के कृषि सचिव के शासनादेश का उल्लेख करते हुए पैनल में शामिल फर्मों के चयन और क्रय आदेश जारी करने में जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी की निर्धारित अनुमोदन प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं इसकी जांच की मांग की।
चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर मंच ने जियो टैगिंग ई-वे बिल सामग्री के ब्रांड फोटो तौल रसीद लाभार्थी चयन रिकॉर्ड उपयोगिता प्रमाणपत्र भुगतान तथा वित्तीय/प्रशासनिक स्वीकृति से जुड़े बिंदुओं की भी जांच की मांग की है।
कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि ड्रिप का पाइप किसान के खेत में पहुंचा देना योजना पूरी होना नहीं है। सिस्टम लगा या नहीं चला या नहीं किसान को प्रशिक्षण मिला या नहीं तीन वर्ष की तकनीकी सेवा मिली या नहीं जांच इन सभी बिंदुओं पर होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में किसान मंच ने District Mineral Foundation (DMF) को लेकर बड़ा सवाल उठाया।उन्होंने कहा कि मंच के पास उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर बागेश्वर तक ही नहीं बल्कि नैनीताल सहित उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी DMF धन के इस्तेमाल की जांच आवश्यकता दिखाई देती है।
किसान मंच ने आरोप लगाया कि नैनीताल जनपद में DMF के अंतर्गत ऐसे मार्गों पर धन खर्च किए जाने के दस्तावेज उसके पास हैं जिनके संबंध में मंच का दावा है कि कार्य प्रभारी मंत्री के निर्देश/संस्तुति पर स्वीकृत हुए और उनका लाभ राजनीतिक कार्यकर्ताओं से जुड़े निजी स्थानीय रास्तों को पहुंचा।
कार्तिक उपाध्याय ने अन्य खर्चों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कहीं एक शौचालय निर्माण पर करीब 15 लाख खर्च होने, कहीं चिकित्सा उपकरण खरीदने के बाद उनका समुचित उपयोग न होने की शिकायतें और दस्तावेज सामने आ रहे हैं। उन्होंने अल्ट्रासाउंड मशीनों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि सार्वजनिक धन से उपकरण खरीद देना पर्याप्त नहीं है यह भी देखा जाना चाहिए कि मशीन चालू है या नहीं उसके लिए प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध है या नहीं और खनन प्रभावित जनता को उससे वास्तव में सेवा मिल रही है या नहीं।
किसान मंच ने मांग की कि उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में DMF की प्राप्त राशि ब्याज, स्वीकृत कार्य, पूर्ण-अपूर्ण कार्य, भुगतान, कार्यदायी संस्था और वर्तमान स्थिति का विवरण सार्वजनिक पोर्टल पर रखा जाए। साथ ही ऐसे सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए जिनमें असामान्य लागत निजी लाभपहुंचाने, अनुपयोगी परिसंपत्ति बनाने अथवा DMF के मूल उद्देश्यों से अलग धन खर्च किए जाने की शिकायत सामने आई हो
कार्तिक उपाध्याय






