पिछले बुधवार को हिमालयी सुनामी का शिकार हुए नेपाल में मारे गए और लापता लोगों की संख्या 5125 पहुंुच गई है। बचाव कर्मचारियों ने 10451 लोगों की जान बचाने में सफलता पायी है। मारे गए और लापता लोगों की संख्या, और ज्यादा होने की आशंका है। इस महाविभीषिका में सबसे बुरी हालत उन लोगों की है, जिनके अपने भोटकोशी और त्रिशूली नदी की घाटियों में स्थित बिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे हुए हैं। ऐसे लोगों की संख्या 813 है। सुरंगों में फंसे लोगों के परिजन सेना, पुलिस के शिविरों, अस्पतालों और स्कूलों में जाकर एक एक शव का मुआयना कर रहे हैं तो कुछ बाढ़ से क्षतिग्रस्त बिजली परियोजनाओं की सुरंगों के मुहाने पर डटे हैं। उन्हें उम्मीद हैं कि उनके अपने, सुरंग के अंदर अभी भी जीवित होंगे। निराशा की बात यह है कि, सुरंगों के अंदर तलाशी का काम मैनुअल तरीके से किया जा रहा है। ऐसे में पीड़ितों के परिजनों का धैर्य टूटता जा रहा है। पेश है नेपाली भाषा के प्रमुख समाचार पत्र- कांतिपुर के हवाले से यह रिपोर्ट –
भोटेकोशी में आई बाढ़ के बाद, 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 894 लोग लापता हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वे सुरंगों के अंदर फंसे हुए हैं या बाढ़ में बह गए हैं।
मोबाइल स्क्रीन को घूरती, मिथु खड़का को याद नहीं कि उन्होंने अब तक कितनी बार फोन डायल कर दिया है। उनके पति कमल खड़का से उनकी आखिरी वीडियो कॉल बाढ़ से ठीक पहले सुबह करीब 8ः30 बजे हुई थी। कमल निर्माणाधीन 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करते हैं। मिथू को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ का पता सुबह 10ः30 बजे पता चला। जब उन्होंने तुरंत कमल को फोन किया तो फोन बंद था। और यहीं से एक अंतहीन इंतजार शुरू हुआ।
मिथू खड़का कहती हैं, मेरे पति नाम न तो लापता लोगों की सूची में है और न ही मिले हुए लोगों की सूची में। ऐसा लगता है- मेरी पूरी दुनिया खत्म हो गई हो।
ग्यारह बिजली परियोजनाएं आयी चपेट में
नेपाल स्वतंत्र विद्युत उत्पादक संघ के अनुसार, 11 जलविद्युत परियोजनाओं (निर्माणाधीन परियोजनाओं सहित) से जुड़े 894 लोग लापता हैं। किसी के पास इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि इन परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी और मजदूर, सुरंगों के अंदर फंसे हुए हैं या बाढ़ में बहकर लापता हो गए हैं। उनके परिवारों ने आखिरी उम्मीद के तौर पर सुरंगों के अंदर खोज करने का दबाव बढ़ा दिया है। मिथु ने कहा, जब तक शव नहीं मिल जाते, तब तक उम्मीद है। हमने कंपनी से खोज करने की अपील की थी, लेकिन कंपनी का कहना है कि सरकार ने हमें सुरंग में खोजबीन की अनुमति नहीं दी।
कंचनपुर के भीमदत्त निवासी अनुष गुरुंग कहते हैं, उनके 60 वर्षीय पिता लक्ष्मण गुरुंग सुरंग के अंदर हो सकते हैं। लक्ष्मण, सिनो हाइड्रो कंपनी के तहत अपर त्रिशूली-1 के मैलुंग वाले हिस्से में काम करते थे। उन्होंने कहा, मेरे पिता के कुछ दोस्तों का कहना है कि उन्होंने उन्हें अंदर जाते देखा था। कोई कहता है कि उन्हें बाहर आते देखा था। हमें किसकी बात पर विश्वास करना चाहिए? उन्होंने कहा, अगर सुरंग के अंदर खोजबीन की होती तो हमें पक्का पता चल जाता।
लक्ष्मण ने बताया कि, मेरी बहन नुवाकोट स्थित सेना शिविर में गई है, मेरा भाई और अन्य रिश्तेदार चितवन में शवों का मुआयना करने गए हैं। मैं और मेरी छोटी बहन काठमांडू के शिक्षण अस्पताल और कंपनी में उनकी तलाश में दौड़ रहे हैं। लेकिन वे कहीं नहीं मिले। अब एकमात्र उम्मीद सुरंग के अंदर ही है। हमें उम्मीद है कि, वे सुरंग के अंदर जीवित मिल सकते हैं। उन्होंने कहा, कंपनी का कहना है कि सड़क ध्वस्त हो गई है इसलिए वहां तक जाना संभव नहीं है।
परिजनों की उम्मीद अभी टूटी नहीं
रूपन्देही जिले के कंचन ग्रामीण नगरपालिका-5 की सीता आचार्य ने बताती हैं कि, बाढ़ के समय मेरा भाई महेश पहाड़ की ओर भाग गया था। उसकी मोबाइल लोकेशन भी लैंगटांग इलाके की ओर इशारा कर रही है। क्या जंगल में चलते समय उसे चोट आ गई, वह कहीं गिर गया या वह किसी सुरंग में था?” उसने कहा। “हम बहुत असमंजस में हैं। क्या करें? कहाँ जाएँ?
अपर त्रिशूली-3 बी जलविद्युत परियोजना से संपर्क टूटने के बाद बचे परिवारों ने बचाव कार्य में देरी पर असंतोष व्यक्त किया है। वे बचाव कार्य के लिए दबाव बनाने हेतु नुवाकोट के बिदुर स्थित सेना बचाव एवं राहत केंद्र पर मौजूद हैं। इनमें से चिलिमे इंजीनियरिंग एंड सर्विसेज कंपनी लिमिटेड के 122 लोग अभी भी लापता हैं। बाढ़ के बाद लापता कमल बहादुर पांडे के बेटे विवेक ने कहा, चार दिनों के निरंतर प्रयासों के बाद सोमवार को सेना आखिरकार एक खुदाई मशीन लेकर आई। अगर इससे खुदाई हो सके तो क्वार्टरों पर जमी रेत को हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा, उम्मीद है कि मेरे पिता जीवित हैं। जितनी जल्दी हो सके खुदाई करना आवश्यक है।
रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना के कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुष्कर अमात्या का कहना है कि, रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना के भूमिगत विद्युत केंद्र में भी कर्मचारी फंसे हुए हैं। एस समय विद्युत केंद्र से सुरंग तक और बाहर शिविर में कई कर्मचारी थे। सोमवार को सेना की एक टीम रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में गई, लेकिन भूमिगत विद्युत केंद्र तक नहीं पहुंच सकी।
60 मेगावाट क्षमता की अपर त्रिशुली-3 ए के विद्युत संयंत्र की सुरंग में विभिन्न परियोजनाओं के अनुभवी तकनीशियन, इंजीनियर और विशेषज्ञ समेत 42 लोग फंसे हुए हैं। बचाव कार्य के दौरान अब तक तक केवल सुरंग ही मिली है। इस परियोजना में लगभग 4.1 किलोमीटर लंबी एक सुरंग और एक भूमिगत विद्युत केंद्र शामिल है।
फोटो- नेपाल त्रासदी (एआई की मदद से)
पूरन बिष्ट (स्वतंत्र पत्रकार)




